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कर दी जिसने दुश्मनों की नींद हराम...वो कलाम चला गया

Tue, 28 Jul 2015 04:17 PM IST
Updated Tue, 28 Jul 2015 04:17 PM IST
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tribute to apj abdul kalam

भारत रत्न कलाम को लोग अपने-अपने अंदाज में श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। ये 5 अनूठे श्रद्धासुमन पढ़कर आपकी आंखें भी नम हो जाएंगीं। (सभी कविताएं सोशल मीडिया से।)

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कलियुग की रामायण का राम चला गया...

कलियुग की रामायण का राम चला गया...

मेरे देश का कलाम चला गया...

जो देता था एकता का पैगाम वो कलाम चला गया...

जिनसे हुई दुश्मनों की नींद हराम वो कलाम चला गया...

जिसने दिया देश को परमाणु सलाम वो कलाम चला गया...

क्या बताऊं दोस्तों वतन का सबसे बड़ा हमनाम चला गया...

मेरा कलाम चला गया... हमारा कलाम चला गया...।।

एक साथ गीता और कुरान चले गए...

tribute to apj abdul kalam

एक साथ गीता और कुरान चले गए...

आधुनिक भारत के भगवान चले गए...

इस देश के असली स्वाभिमान चले गए...

धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चले गए...

एक साथ गीता और कुरान चले गए...

मानवता के एकल प्रतिष्ठान चले गए...

धर्मनिरपेक्षता के मूल संविधान चले गए...

इस सदी के श्रेष्ठ ऋषि महान चले गए...

कलयुग के इकलौते इंसान चले गए...

ज्ञान राशि के अमित निधान चले गए...

सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए...।।

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जब अनंत आकाश भी दहल उठता था...

tribute to apj abdul kalam

जब अनंत आकाश भी दहल उठता था...

मुख मौन हैं...

महिमायें आपके सामने गौण हैं...

माँ भारती का शक्तिध्वज...

फहराने बचा ही कौन है...

सूनी पड़ गई ये धरती...

आपके अलविदा कह जाने से...

जब अनंत आकाश भी दहल उठता था...

आपकी मिसाइल टकराने से...

सच्ची श्रद्धांजलि के लिए युवाओं को...

आगे आना होगा...

कलाम अलख भीतर जगा...

माँ भारती को मनाना होगा...

हे कलाम उदास मत होना हम आयेंगे हम आयेंगे...

आपकी प्रेरणा की ताकत ले स्वप्न उड़ान भर जायेंगे...।।

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वे किसी के अब्दुल होते हैं... किसी के कलाम...

tribute to apj abdul kalam

वे किसी के अब्दुल होते हैं... किसी के कलाम...

बोलते-बोलते अचानक धड़ाम से...

जमीन पर गिरा एक फिर वटवृक्ष...

फिर कभी नहीं उठने के लिए...

वृक्ष जो रत्न था...

वृक्ष जो शक्तिपुंज था...

वृक्ष जो न बोले तो भी...

खिलखिलाहट बिखेरता था...

चीर देता था हर सन्नाटे का सीना...

सियासत से कोसों दूर...

अन्वेषण के अनंत नशे में चूर...

वृक्ष अब नहीं उठेगा कभी...

अंकुरित होंगे उसके सपने...

फिर इसी जमीन से...

उगलेंगे मिसाइलें...

शान्ति के दुश्मनों को...

सबक सीखने के लिए...

वृक्ष कभी मरते नहीं...

अंकुरित होते हैं...

नए-नए पल्लवों के साथ...

वे किसी के अब्दुल होते हैं...

किसी के कलाम...

अलविदा...अलविदा...अलविदा...।।

आज मैं भी गमगीन हूं मेरी कलम भी गमगीन है...

tribute to apj abdul kalam

आज मैं भी गमगीन हूं मेरी कलम भी गमगीन है...

वो कलाम नहीं कमाल थे...

मिसाइलमैन वो बेमिसाल थे...

उनकी खूबियां करती रहेगीं

पथ प्रदर्शन मेरा...

वो मेरी मातृभूमि की ढाल थे...

वो कलाम नहीं कमाल थे...।।

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तेरे ना होने का शिकवा तुझसे कैसै लिखूं ए कलाम...

आज मैं भी गमगीन हूं मेरी कलम भी गमगीन है...।।

एक सितारा भारत माता की आंखों का टूट गया...

tribute to apj abdul kalam
एक सितारा भारत माता की आंखों का टूट गया...

आज समय का पहिया घूमा...

पीछे सबकुछ छूट गया...

एक सितारा भारत माता की...

आंखों का टूट गया...

उसकी आंखे बंद हुई तो...

पलकें कई निचोड़ गया...

सदियों तक न भर पायेगा...

वो खालीपन छोड़ गया...

ना मज़हब का पिछलग्गू था...

ना गफलत में लेटा था...

वो अब्दुल कलाम तो केवल...

भारत मां का बेटा था...

बचपन से ही खुली आंख से...

सपने देखा करता था...

नाविक का बेटा हाथों में...

सात समंदर भरता था...

था बंदा इस्लाम का लेकिन...

कभी न ऐंठा करता था...

जब जी चाहा...

संतो के चरणों में बैठा करता था...

एक हाथ में गीता उसने एक हाथ क़ुरआन रखा...

लेकिन इन दोनों से ऊपर पहले हिन्दुस्तान रखा...

नहीं शरीयत में उलझा वो...

अपनी कीमत भांप गया...

कलम उठाकर अग्निपंख से...

अंतरिक्ष को नाप गया...

दाढ़ी टोपी के लफड़ों में नही पड़ा...

अलमस्त रहा वो तो केवल...

मिसाइलों के निर्माणों में व्यस्त रहा...

मर्द मुजाहिद था असली...

हर बंधन उसने तोडा था...

अमरीका को ठेंगा देकर...

एटम बम को फोड़ा था...

मोमिन का बेटा भारत की पूरी पहरेदारी था...

ओवैसी, दाऊद, सौ सौ अफज़ल गुरुओं पर भारी था...

आकर्षक व्यक्तित्व,सरल थे, बच्चों के दीवाने थे...

इस चाचा के आगे, चाचा नेहरू बहुत पुराने थे...

माथे पर लटकी ज़ुल्फ़ों ने पावन अर्थ निकाल दिया...

यूँ लगता था भारत माँ ने आँचल सर पर डाल दिया...

गौरव को गौरव है तुम पर...

फक्र लिए हूं सीने में...

जीना तो बस जीना है...

अब्दुल कलाम सा जीने में...

माना अब भी इस भारत में...

कायम गज़नी बाबर हैं...

लेकिन ऐसे मोमिन पर सौ सौ हिन्दू न्योछावर हैं...।।

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