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भारत के लोकप्रिय कार्टूनिस्ट 'लक्ष्मण' और 'कॉमन मैन'

Tue, 27 Jan 2015 11:21 AM IST
राजिंदर पुरी / कार्टूनिस्ट
राजिंदर पुरी / कार्टूनिस्ट Updated Tue, 27 Jan 2015 11:21 AM IST
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tribute for india famous cartoonist laxman

शंकर के बाद लक्ष्मण ही वो कार्टूनिस्ट थे, जो देश के जन जन में लोकप्रिय थे। उन्होंने आम आदमी को अपना विषय बनाया था और आम आदमी में वो सबसे अधिक लोकप्रिय भी थे। राजनीतिक टीकाकार के रूप में कुट्टी और अबू अब्राहम की रचनाओं में शायद अधिक पैनापन था। पर लक्ष्मण आम आदमी से जुड़े हुए थे। कोई ताज्जुब नहीं कि उन्होंने ‘कॉमन मैन’ को ही चुना।

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आम आदमी का संघर्ष बयां करना
कॉमन मैन’ ने आम आदमी की कल्पना को समझा और यह पूरे देश में इतनी तेज़ी से फ़ैला कि एक राष्ट्रीय प्रतीक बन गया। लक्ष्मण की कलात्मकता बेजोड़ थी।

विषय के साथ चीर फाड़ करने की समझ, पृष्ठभूमि का ज्ञान और कूची की कलात्मकता ने उनकी कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ला खड़ा किया। लक्ष्मण कभी भी किसी शैली से जुड़े नहीं रहे। उनका काम हकीकत के धरातल पर था और उसमें किसी तरह का भटकाव नहीं था।
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कॉमन मैन से दिन की शुरूआत

tribute for india famous cartoonist laxman

वे कुछ कुछ डेविड लॉ से प्रभावित थे। पर लॉ कम लाइनों का इस्तेमाल करते थे और उनके कार्टून में विस्तृत जानकारी कम होती थी। गैर जरूरी चीजों को मेहनत कर के कार्टून से बाहर निकालने की वजह से लॉ के कार्टून ज्यादा प्रभावशाली थे।

पॉकेट कार्टून ने लक्ष्मण के ‘कॉमन मैन’ को पूरे देश का प्रतीक बना दिया। एक समय था जब प्रशासन की वजह से खड़ी की गई रोज़मर्रा की तमाम दिक्क़तों को

लक्ष्मण अपने कार्टून में आम आदमी की तकलीफ के रूप में उकेर देते थे। मुंबई के लोगों के दिन की शुरुआत ही चाय और ‘कॉमन मैन’ की दिक्कतों पर कटाक्षभरी हंसी के साथ होती थी। ‘कॉमन मैन’ पहले लोगों की आदत में शुमार हुआ और बाद में वह उनकी लत बन गया।

कार्टून जो बना आदत

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भारत के अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने लक्ष्मण की लोकप्रियता को खूब भुनाया। इससे अखबार और कार्टूनिस्ट, दोनों को आगे बढ़ने में काफी सहूलियत हुई।

लक्ष्मण का ‘कॉमन मैन’ लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब होने वाला पहला पॉकेट कार्टून नहीं था। इसके पहले टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ही अपने दिल्ली संस्करण

में ‘बाबूजी’ नाम से कार्टून शुरू किया था। सैम्युअल इसे बनाते थे। यह भी काफ़ी लोकप्रिय हुआ था। बाद में मुंबई से लक्ष्मण का कॉमन मैन शुरू किया गया। बाकी तो इतिहास ही है।

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