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छत्तीसगढ़ में आदिवासी की भूख से मौत: कांग्रेस

Thu, 29 Oct 2015 12:03 AM IST
Updated Thu, 29 Oct 2015 12:03 AM IST
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Tribal dies of hunger in 'food secure' Chhattisgarh, matter will goes to President

छत्तीसगढ़ में विपक्षी दल कांग्रेस का आरोप है कि भूख की वजह से आदिम जनजाति के एक व्यक्ति की मौत हो गई है। कांग्रेस का आरोप है कि इस व्यक्ति के पास न तो राशन कार्ड था और न ही सरकार की ओर से गरीबों को दी जाने वाली स्वास्थ्य कार्ड जैसी दूसरी सुविधाएं। इस व्यक्ति का नाम लंबू राम था और उसकी उम्र 60 वर्ष थी। वह पहाड़ी दुर्लभ जनजाति कोरवा जनजाति से था, जिसे संरक्षित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। संरक्षित जनजातियों को भारत के राष्ट्रपति से सीधा संरक्षण प्राप्त होता है।

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दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने एक पत्रवार्ता में आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार की नीतियों की वजह से लंबू राम को भूख से जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि वे लंबू राम के परिवार के साथ राष्ट्रपति से मिलेंगे और भूख से मौत का यह मामला उठाएंगे। उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है।
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अमर उजाला से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "एक ओर तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे दिन का वादा कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि भाजपा शासित राज्यों ने विकास के नए पैमाने गढ़े हैं लेकिन दूसरी ओर संरक्षित जनजाति का एक व्यक्ति भूख से मर रहा है।" उन्होंने कहा कि इस एक मौत ने रमन सिंह सरकार और केंद्र सरकार दोनों के विकास के दावों की कलई खोल दी है।
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परिवार से मिलने गए थे कांग्रेसी

Tribal dies of hunger in 'food secure' Chhattisgarh, matter will goes to President

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के जशपुर के एक गांव में रहने वाले लंबू राम के परिवार के पास एक राशन कार्ड जरूर है लेकिन इस कार्ड में लंबू राम का नाम दर्ज नहीं है। पत्रवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि लंबू राम की मां के नाम से जारी यह राशन कार्ड बना तो 2014 में है क्योंकि इसमें वर्तमान सरपंच के दस्तखत हैं जो 2014 में ही निर्वाचित हुए हैं। लेकिन इसमें राशन लेने की तिथि 2013 की दर्ज है और मात्र दस किलो चावल दिया गया है। जबकि गुलाबी राशनकार्ड धारी लंबू राम की मां बिफनी अत्यंत गरीब परिवार से है और हर माह 35 किलो अनाज पाने की हकदार हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए वाहवाही लूटने वाली रमन सिंह की सरकार ने इसमें भी खूब लीपापोती की है। देश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि इस व्यक्ति के पास स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिलने वाला स्मार्ट कार्ड भी नहीं था और न ही आधार कार्ड और न ही वनाधिकार पट्टा इत्यादि। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संरक्षित जनजाति के लोगों के साथ इसी तरह का व्यवहार कर रही है।

उन्होंने कहा कि खबर मिलने के बाद वे खुद लंबू राम के गांव गए थे और उन्होंने पाया कि गांव के 8-10 घरों में से किसी में भी अन्न उपलब्ध नहीं था जबकि नियमानुसार हर परिवार हर माह कम से कम 35 किलो चावल पाने का हकदार है। उन्होंने बताया कि पहाड़ी कोरवा आदिवासी परिवार के लोग कंदमूल खाकर जीवन बसर कर रहे हैं। दोनों कांग्रेस नेता इस मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात करने वाले हैं।

भूख की वजह से लंबू की मौत

Tribal dies of hunger in 'food secure' Chhattisgarh, matter will goes to President

यह पूरा वाकया छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर में बगीचा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले केलेदरागढ़ा का है। परिवार का मुखिया लंबू राम लकड़ी बेचकर अपने परिवार का खर्च चलाता था। किसी तरह उसके परिवार का गुजर-बसर चल रहा था। सितम्बर महीने उसकी पत्नी सुखनी बाई की बांयी आंख में एक फुंसी हो गई। ईलाज के अभाव में सुखनी की आंखे धंसने लगी थी और लंबू के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह उसका ईलाज करवा पाए। आखिरकार उसने हिम्मत बांधकर अपनी पत्नी का ईलाज करवाने की ठानी और 9 सितम्बर को उसे लेकर गांव से दूर प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंचा।

वहां सुखनी को रोजाना इंजेक्शन दिया जा रहा था और कम दिखने के कारण उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य के आसपास की झोपड़ियों में रात बिताने लगे। यह सिलसिला 12 सितम्बर तक चलता रहा। लंबू राम की पत्नी का कहना है कि इलाज के दौरान लंबू किसी तरह आसपास से उसके लिए खाने का इंतजाम तो कर देता था लेकिन खुद बिना खाए ही रह जाता था।

उसकी पत्नी ने जो किस्सा बयान किया उसके अनुसार लंबू राम को उसके कुर्बानी की सजा 12 सितम्बर को घर वापस लौटते समय मिली। उस दिन घर वापसी के दौरान लेदरागढ़ा से पांच किमी पहले खूटाटांगर गांव में वह भूख की वजह से तड़पने लगा और कुछ ही देर में वहीं दम तोड़ दिया। उसकी पत्नी का कहना है कि वह यह सब अपने आंखों सामने होता देखती रही लेकिन वह कर भी क्या सकती थी?

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