{"_id":"cc6810f6-1944-11e2-8947-d4ae52bc57c2","slug":"trial-against-amit-shah-stays","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमित शाह के खिलाफ सुनवाई पर रोक","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
अमित शाह के खिलाफ सुनवाई पर रोक
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Oct 2012 10:26 PM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने तुलसीराम प्रजापति फर्जी मुठभेड़ कांड में गुजरात के पूर्व मंत्री अमित शाह के खिलाफ निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। जस्टिस पी. सदाशिवम् व जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने शाह की याचिका पर अहमदाबाद की अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने के साथ ही सीबीआई से जवाब-तलब किया।
एजेंसी को पीठ ने अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली तारीख 23 नवंबर तय कर दी। शाह की दलील है कि प्रजापति हत्याकांड सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड का ही हिस्सा है। इसलिए दोनों मुकदमों की सुनवाई एक साथ होनी चाहिए। शाह की ओर से पेश अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रजापति मामले में नई प्राथमिकी दायर करने की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि यह मामला सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया था।
रोहतगी ने पीठ से कहा कि प्रजापति मामले में दायर आरोप पत्र को वास्तव में सोहराबुद्दीन मुठभेड़ कांड में ही पूरक आरोप पत्र माना जाना चाहिए। सीबीआई ने 2006 के प्रजापति फर्जी मुठभेड़ कांड में 29 सितंबर को अदालत में आरोप पत्र दायर किया था। इसमें शाह व 19 अन्य को आरोपी बनाया गया है। विशेष अदालत ने जांच ब्यूरो का आरोप पत्र स्वीकार करते हुए इसके संज्ञान की प्रक्रिया सारे दस्तावेज की पुष्टि होने तक लंबित रखी थी।
विज्ञापन
याद रहे कि शाह सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और उसकी पत्नी कौसर बी की नवंबर, 2005 में हुई हत्या के मामले में भी मुख्य आरोपी हैं। तुलसीराम प्रजापति की हत्या 28 दिसंबर, 2006 को हुई थी। सीबीआई का दावा है कि सोहराबुद्दीन मुठभेड़ कांड में प्रजापति चश्मदीद गवाह था और उसकी हत्या एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।
विज्ञापन
एजेंसी को पीठ ने अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली तारीख 23 नवंबर तय कर दी। शाह की दलील है कि प्रजापति हत्याकांड सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड का ही हिस्सा है। इसलिए दोनों मुकदमों की सुनवाई एक साथ होनी चाहिए। शाह की ओर से पेश अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रजापति मामले में नई प्राथमिकी दायर करने की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि यह मामला सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया था।
विज्ञापन
रोहतगी ने पीठ से कहा कि प्रजापति मामले में दायर आरोप पत्र को वास्तव में सोहराबुद्दीन मुठभेड़ कांड में ही पूरक आरोप पत्र माना जाना चाहिए। सीबीआई ने 2006 के प्रजापति फर्जी मुठभेड़ कांड में 29 सितंबर को अदालत में आरोप पत्र दायर किया था। इसमें शाह व 19 अन्य को आरोपी बनाया गया है। विशेष अदालत ने जांच ब्यूरो का आरोप पत्र स्वीकार करते हुए इसके संज्ञान की प्रक्रिया सारे दस्तावेज की पुष्टि होने तक लंबित रखी थी।
विज्ञापन
याद रहे कि शाह सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और उसकी पत्नी कौसर बी की नवंबर, 2005 में हुई हत्या के मामले में भी मुख्य आरोपी हैं। तुलसीराम प्रजापति की हत्या 28 दिसंबर, 2006 को हुई थी। सीबीआई का दावा है कि सोहराबुद्दीन मुठभेड़ कांड में प्रजापति चश्मदीद गवाह था और उसकी हत्या एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।