Exclusive: IIT में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करेंगे ट्रांसजेंडर
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यह पहला मौका है कि माइनिंग इंजीनियरिंग और माइनिंग मशीनरी 2015-16 में ट्रांसजेंडर को भी एडमिशन मिल सकेगा। इसका सर्कुलर आईआईटी मुंबई ने दो मई को जारी कर दिया है।
सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसजेंडर को ज्यादातर यूनिवर्सिटी, डिग्री कॉलेज, तकनीकी, प्रौद्योगिकी और चिकित्सा संस्थान की एडमिशन प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है।
सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर महिला और पुरुष के बाद ट्रांसजेंडर को थर्ड जेंडर में शामिल कर लिया गया है। अब इन्हें एडमिशन का मौका दिया जा रहा है।
सबसे पहले ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट (जेईई) मेन और एडवांस 2015 के फार्म भरवाकर आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी में एडमिशन का विकल्प दिया गया। अब माइनिंग कोर्स में एडमिशन का मौका मिला है। यह ऐसा कोर्स है, जिसमें सिर्फ पुरुष अभ्यर्थियों को एडमिशन मिलता रहा है। महिलाओं के एडमिशन पर रोक है। इसलिए ट्रांसजेंडर के एडमिशन को खास माना जा रहा है।
सिर्फ पुरूषों को अभी तक मिलता था एडमिशन
आईआईटी कानपुर परिक्षेत्र के जेईई चेयरमैन प्रो. टी. सनमुग राज ने बताया कि सेक्शन 46(1) ऑफ द माइंस एक्ट 1952 में प्रावधान है कि माइनिंग इंजीनियरिंग में महिलाओं को एडमिशन नहीं दिया जाएगा।
इस कोर्स में जमीन के नीचे (सुरंग की मदद से) जाकर खनन की जानकारी दी जाती है। छह से 19 घंटे तक जमीन के अंदर रहना पड़ता है। महिला अभ्यर्थियों के लिए यह काम खतरनाक हो सकता है।
यही वजह है कि माइनिंग और माइनिंग मशीनरी सरीखे कोर्स में महिलाओं के एडमिशन पर रोक है। अब माइनिंग में पुरुषों के साथ ट्रांसजेंडर को एडमिशन का विकल्प मिला है। इससे ट्रांसजेंडर उत्साहित हैं। बताते चलें कि माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईएसएम धनबाद से होती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसजेंडर को एडमिशन
आईआईटी बीएचयू और खड़गपुर भी इसकी पढ़ाई कराते हैं। दूसरी तरफ छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी कैंपस और संबद्ध डिग्री कॉलेजों के एलएलबी सहित 42 पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए प्रस्तावित संयुक्त प्रवेश परीक्षा के ऑनलाइन, ऑफलाइन फार्म में भी मंगलामुखियों के विकल्प हैं। ये फार्म 30 मई तक भरे जाएंगे।
ट्रांसजेंडर फार्म भरकर एलएलबी फाइव ईयर, एलएलबी थ्री ईयर, बीबीए, बीसीए, एमफिल, एमएससी, बीएससी बायोटेक सहित तमाम कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसजेंडर को एडमिशन का विकल्प दिया गया है।