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खेमका के तबादले ने पकड़ा तूल, कांग्रेस पर चौतरफा हमला
चंडीगढ़/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 17 Oct 2012 01:56 AM IST
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच हरियाणा में जमीन सौदों को लेकर राज्य के चकबंदी महानिदेशक अशोक खेमका के तबादले ने तूल पकड़ लिया है। तबादले पर खेमका द्वारा सवाल उठाने के बाद राजनीतिक दलों ने कांग्रेस और राज्य सरकार को घेर लिया। हरियाणा सरकार का कहना है कि तबादले का वाड्रा-डीएलएफ जमीन सौदे से कोई लेना-देना नहीं है।
उल्लेखनीय है कि खेमका ने चकबंदी महानिदेशक पद छोड़ते समय 15 अक्तूबर को वाड्रा द्वारा डीएलएफ को बेची 3.53 एकड़ जमीन का म्यूटेशन (इंतकाल) रद कर दिया। यह म्यूटेशन 20 सितंबर को गुड़गांव के सहायक चकबंदी अधिकारी ने किया था। जमीन की रजिस्ट्री 18 सितंबर को हुई थी, जिसे खेमका ने सही नहीं माना था।
यही नहीं खेमका ने 12 अक्तूबर को एनसीआर से जुड़े हरियाणा के चार जिलों पलवल, मेवात, फरीदाबाद और गुड़गांव में वाड्रा की सारी संपत्ति की जांच के आदेश जिलों के कलेक्टर सह-रजिस्ट्रार को देते हुए 25 अक्तूबर तक रिपोर्ट भेजने को कह दिया। विवाद बढ़ने के बाद हरियाणा के मुख्य सचिव पीके चौधरी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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1991 बैच के आईएएस खेमका का आरोप है कि उन्हें अपने फैसलों के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है और 20 साल के करियर में यह 43वां तबादला है। उनके आरोपों पर पीके चौधरी ने मंगलवार को दावा किया कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया है। साथ ही चौधरी ने जानकारी दी कि खेमका के मामलों की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व की अध्यक्षता वाली कमेटी गठित की गई है।
उल्लेखनीय है कि खेमका का तबादला चकबंदी महानिदेशक और लैंड रिकॉर्ड महानिरीक्षक से हरियाणा बीज विकास निगम के एमडी पद पर कर दिया गया है। खेमका के स्थानांतरण की बात सामने आने के बाद राजनीतिक दलों ने हरियाणा सरकार और कांग्रेस पर हमला बोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी के सौदों पर खेमका द्वारा अंगुली उठाए जाने के कारण उनका तबादला किया गया है।
खेमका ने कहा, सौदे की रकम कम दिखाई गई
चंडीगढ़ (ब्यूरो)/अशोक खेमका ने रॉबर्ड वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा डीएलएफ के साथ जमीन सौदे की कीमत सरकारी रिकॉर्ड में कम बताए जाने की बात इंगित करते हुए अपने आदेश में कहा था कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है।
गुड़गांव में शिकोहपुर गांव की 3.53 एकड़ जमीन के 12 फरवरी 2008 को किए गए सौदे पर अपने आदेश में खेमका ने लिखा कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने यह जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके बाद इसमें से 2.70 एकड़ जमीन के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से 28 मार्च 2008 को कॉमर्शियल लाइसेंस लिया और जून 2008 में इसका सौदा डीएलएफ से 58 करोड़ रुपये में कर लिया। खेमका के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री पिछले 18 सितंबर को हुई और दो दिन बाद ही 20 सितंबर को इंतकाल भी हो गया।
खेमका ने इस जमीन का इंतकाल रद करने के आदेश देते हुए दलील दी कि सहायक चकबंदी अधिकारी ने यह प्रक्रिया संपन्न की लेकिन उसे इसका अधिकार नहीं थी। खेमका ने इंतकाल रद करने के आदेश से और आगे जाते हुए पलवल, मेवात, फरीदबाद और गुड़गांव के कलेक्टरों को एनसीआर में वाड्रा द्वारा किए गए सभी जमीन सौदों की जांच के आदेश 12 अक्तूबर को दे दिए।
जबकि राज्य सरकार इससे पहले 11 अक्तूबर को खेमका के तबादला आदेश जारी कर चुकी थी। साथ ही खेमका ने आशंका जताई कि कुछ ही दिनों पहले बनाई गई वाड्रा की विभिन्न कंपनियों को पंचायतों की कई हजार करोड़ रुपये मूल्य की जमीन कम कीमत पर ट्रांसफर की गई। जानबूझकर कम कीमत में भारी जमीन हथियाए जाने से पंचायतों को भी भारी नुकसान हुआ है।
जानकारी छिपा लाइसेंस लेने का आरोप लगाया
खेमका ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए आदेश में लिखा, ‘वाड्रा ने जून 2008 में यह जमीन डीएलएफ को बेचने का सौदा कर लिया था। वाड्रा ने 7 अक्तूबर 2009 तक 50 करोड़ रुपये डीएलएफ से ले लिए थे। इसके बावजूद वाड्रा ने 18 जनवरी 2011 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अपना कामर्शियल लाइसेंस भी रिन्यू करा लिया।
वाड्रा ने प्लानिंग विभाग से यह जानकारी भी छिपा ली कि इस जमीन को डीएलएफ को बेचने का सौदा कर रखा है। इसके बावजूद विभाग ने 3 अप्रैल 2012 को वाड्रा को यह जमीन बेचने की अनुमति दे दी और लाइसेंस भी कैसे रिन्यू कर दिया।
खेमका को मिल रही ‘धमकियां’
चंडीगढ़। वरिष्ठ आईएएस अफसर अशोक खेमका को अब अज्ञात लोगों से धमकियां मिल रही हैं। यह खुलासा उनके वकील मित्र अनुपम गुप्ता ने किया है। उन्होंने मीडिया से कहा, ‘मैं जब मिला तो उन्होंने बताया कि कुछ लोग उन्हें धमकियां देकर अपनी गतिविधियां बंद करने को कह रहे हैं।’ कुछ फोन करने वालों ने उन्हें चुप होने या जान से हाथ धोने को तैयार रहने के लिए कहा है। गुप्ता के अनुसार, ‘उन्होंने मुझे बताया कि कुछ लोगों ने हत्या की ‘सुपारी’ भी दे दी है।’ खेमका का कहना है कि यदि इस तरह के फोन आते रहे तो वह सुरक्षा पाने के लिए कोर्ट की शरण ले सकते हैं।
20 साल में 43 तबादले
अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह अपनी भ्रष्टाचार विरोधी और ईमानदार छवि के कारण प्रशासकों में लोकप्रिय हैं। काम को लेकर उनकी सख्ती, घपलों-घोटालों का विरोध और साफगोई का ही नतीजा कह सकते हैं कि 20 साल के करियर में उनके 43 बार तबादले हुए।
2004 में वह तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का आदेश मानने से इनकार कर दिया था, जब सरकार ने कई शिक्षकों के तबादले बीच सत्र में ही करने को कहा था। खेमका का तबादला इस बार हरियाणा सरकार ने भू-राजस्व से बीज निगम में किया है, जहां आम तौर पर जूनियर अधिकारियों को भेजा जाता है।
ये है इमरजेंसी जैसी मानसिकता : भाजपा
हम कांग्रेस के इस कदम की निंदा करते हैं। अशोक खेमका का ट्रांसफर कर उन्हें शिकार बनाया गया है। यह कांग्रेस की आपातकाल के दिनों वाली मानसिकता है, जिसमें उसने साफ कर दिया है कि पार्टी के ‘प्रथम परिवार’ की तरफ जो भी अंगुली उठाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
- प्रकाश जावड़ेकर, भाजपा प्रवक्ता
आधारहीन आरोप, किसी पर निशाना नहीं : कांग्रेस
सारे आरोप आधारहीन हैं। हम किसी को निशाना नहीं बना रहे। किसी से बदला नहीं ले रहे। हमें अफसर की ईमानदारी और कार्यनिष्ठा पर कोई शक नहीं है। किसी ब्यूरोक्रेट का ट्रांसफर सरकार के अधिकार क्षेत्र की बात है। मुख्य सचिव ही इस स्थानांतरण के कारण बता सकते हैं।
-बीके हरिप्रसाद, कांग्रेस महासचिव
- वाड्रा-डीएलएफ डील समेत सारे घोटालों की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से करवाई जाए क्योंकि किसी अन्य जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है।
ओमप्रकाश चौटाला, इनेलो सुप्रीमो और विपक्ष के नेता
- खेमका का तबादला करना सरकार का अधिकार है। उन्होंने जो आरोप लगाए हैं उनकी जांच होगी। मुख्य सचिव को जांच के लिए कह दिया है। अगर खेमका ने गलत बयानबाजी की होगी तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री, हरियाणा
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उल्लेखनीय है कि खेमका ने चकबंदी महानिदेशक पद छोड़ते समय 15 अक्तूबर को वाड्रा द्वारा डीएलएफ को बेची 3.53 एकड़ जमीन का म्यूटेशन (इंतकाल) रद कर दिया। यह म्यूटेशन 20 सितंबर को गुड़गांव के सहायक चकबंदी अधिकारी ने किया था। जमीन की रजिस्ट्री 18 सितंबर को हुई थी, जिसे खेमका ने सही नहीं माना था।
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यही नहीं खेमका ने 12 अक्तूबर को एनसीआर से जुड़े हरियाणा के चार जिलों पलवल, मेवात, फरीदाबाद और गुड़गांव में वाड्रा की सारी संपत्ति की जांच के आदेश जिलों के कलेक्टर सह-रजिस्ट्रार को देते हुए 25 अक्तूबर तक रिपोर्ट भेजने को कह दिया। विवाद बढ़ने के बाद हरियाणा के मुख्य सचिव पीके चौधरी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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1991 बैच के आईएएस खेमका का आरोप है कि उन्हें अपने फैसलों के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है और 20 साल के करियर में यह 43वां तबादला है। उनके आरोपों पर पीके चौधरी ने मंगलवार को दावा किया कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया है। साथ ही चौधरी ने जानकारी दी कि खेमका के मामलों की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व की अध्यक्षता वाली कमेटी गठित की गई है।
उल्लेखनीय है कि खेमका का तबादला चकबंदी महानिदेशक और लैंड रिकॉर्ड महानिरीक्षक से हरियाणा बीज विकास निगम के एमडी पद पर कर दिया गया है। खेमका के स्थानांतरण की बात सामने आने के बाद राजनीतिक दलों ने हरियाणा सरकार और कांग्रेस पर हमला बोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी के सौदों पर खेमका द्वारा अंगुली उठाए जाने के कारण उनका तबादला किया गया है।
खेमका ने कहा, सौदे की रकम कम दिखाई गई
चंडीगढ़ (ब्यूरो)/अशोक खेमका ने रॉबर्ड वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा डीएलएफ के साथ जमीन सौदे की कीमत सरकारी रिकॉर्ड में कम बताए जाने की बात इंगित करते हुए अपने आदेश में कहा था कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है।
गुड़गांव में शिकोहपुर गांव की 3.53 एकड़ जमीन के 12 फरवरी 2008 को किए गए सौदे पर अपने आदेश में खेमका ने लिखा कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने यह जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके बाद इसमें से 2.70 एकड़ जमीन के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से 28 मार्च 2008 को कॉमर्शियल लाइसेंस लिया और जून 2008 में इसका सौदा डीएलएफ से 58 करोड़ रुपये में कर लिया। खेमका के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री पिछले 18 सितंबर को हुई और दो दिन बाद ही 20 सितंबर को इंतकाल भी हो गया।
खेमका ने इस जमीन का इंतकाल रद करने के आदेश देते हुए दलील दी कि सहायक चकबंदी अधिकारी ने यह प्रक्रिया संपन्न की लेकिन उसे इसका अधिकार नहीं थी। खेमका ने इंतकाल रद करने के आदेश से और आगे जाते हुए पलवल, मेवात, फरीदबाद और गुड़गांव के कलेक्टरों को एनसीआर में वाड्रा द्वारा किए गए सभी जमीन सौदों की जांच के आदेश 12 अक्तूबर को दे दिए।
जबकि राज्य सरकार इससे पहले 11 अक्तूबर को खेमका के तबादला आदेश जारी कर चुकी थी। साथ ही खेमका ने आशंका जताई कि कुछ ही दिनों पहले बनाई गई वाड्रा की विभिन्न कंपनियों को पंचायतों की कई हजार करोड़ रुपये मूल्य की जमीन कम कीमत पर ट्रांसफर की गई। जानबूझकर कम कीमत में भारी जमीन हथियाए जाने से पंचायतों को भी भारी नुकसान हुआ है।
जानकारी छिपा लाइसेंस लेने का आरोप लगाया
खेमका ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए आदेश में लिखा, ‘वाड्रा ने जून 2008 में यह जमीन डीएलएफ को बेचने का सौदा कर लिया था। वाड्रा ने 7 अक्तूबर 2009 तक 50 करोड़ रुपये डीएलएफ से ले लिए थे। इसके बावजूद वाड्रा ने 18 जनवरी 2011 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अपना कामर्शियल लाइसेंस भी रिन्यू करा लिया।
वाड्रा ने प्लानिंग विभाग से यह जानकारी भी छिपा ली कि इस जमीन को डीएलएफ को बेचने का सौदा कर रखा है। इसके बावजूद विभाग ने 3 अप्रैल 2012 को वाड्रा को यह जमीन बेचने की अनुमति दे दी और लाइसेंस भी कैसे रिन्यू कर दिया।
खेमका को मिल रही ‘धमकियां’
चंडीगढ़। वरिष्ठ आईएएस अफसर अशोक खेमका को अब अज्ञात लोगों से धमकियां मिल रही हैं। यह खुलासा उनके वकील मित्र अनुपम गुप्ता ने किया है। उन्होंने मीडिया से कहा, ‘मैं जब मिला तो उन्होंने बताया कि कुछ लोग उन्हें धमकियां देकर अपनी गतिविधियां बंद करने को कह रहे हैं।’ कुछ फोन करने वालों ने उन्हें चुप होने या जान से हाथ धोने को तैयार रहने के लिए कहा है। गुप्ता के अनुसार, ‘उन्होंने मुझे बताया कि कुछ लोगों ने हत्या की ‘सुपारी’ भी दे दी है।’ खेमका का कहना है कि यदि इस तरह के फोन आते रहे तो वह सुरक्षा पाने के लिए कोर्ट की शरण ले सकते हैं।
20 साल में 43 तबादले
अशोक खेमका 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह अपनी भ्रष्टाचार विरोधी और ईमानदार छवि के कारण प्रशासकों में लोकप्रिय हैं। काम को लेकर उनकी सख्ती, घपलों-घोटालों का विरोध और साफगोई का ही नतीजा कह सकते हैं कि 20 साल के करियर में उनके 43 बार तबादले हुए।
2004 में वह तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का आदेश मानने से इनकार कर दिया था, जब सरकार ने कई शिक्षकों के तबादले बीच सत्र में ही करने को कहा था। खेमका का तबादला इस बार हरियाणा सरकार ने भू-राजस्व से बीज निगम में किया है, जहां आम तौर पर जूनियर अधिकारियों को भेजा जाता है।
ये है इमरजेंसी जैसी मानसिकता : भाजपा
हम कांग्रेस के इस कदम की निंदा करते हैं। अशोक खेमका का ट्रांसफर कर उन्हें शिकार बनाया गया है। यह कांग्रेस की आपातकाल के दिनों वाली मानसिकता है, जिसमें उसने साफ कर दिया है कि पार्टी के ‘प्रथम परिवार’ की तरफ जो भी अंगुली उठाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
- प्रकाश जावड़ेकर, भाजपा प्रवक्ता
आधारहीन आरोप, किसी पर निशाना नहीं : कांग्रेस
सारे आरोप आधारहीन हैं। हम किसी को निशाना नहीं बना रहे। किसी से बदला नहीं ले रहे। हमें अफसर की ईमानदारी और कार्यनिष्ठा पर कोई शक नहीं है। किसी ब्यूरोक्रेट का ट्रांसफर सरकार के अधिकार क्षेत्र की बात है। मुख्य सचिव ही इस स्थानांतरण के कारण बता सकते हैं।
-बीके हरिप्रसाद, कांग्रेस महासचिव
- वाड्रा-डीएलएफ डील समेत सारे घोटालों की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से करवाई जाए क्योंकि किसी अन्य जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है।
ओमप्रकाश चौटाला, इनेलो सुप्रीमो और विपक्ष के नेता
- खेमका का तबादला करना सरकार का अधिकार है। उन्होंने जो आरोप लगाए हैं उनकी जांच होगी। मुख्य सचिव को जांच के लिए कह दिया है। अगर खेमका ने गलत बयानबाजी की होगी तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
- भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री, हरियाणा