जानिए, कैसे होती है डॉग स्क्वाड की ट्रेनिंग, क्या खिलाते हैं इन्हें
विस्फोटकों की जांच में अथवा किसी आपराधिक घटना में सुरागकशी के काम में लाए जाने वाले डाग स्क्वाड में शामिल कुत्तों को कड़े प्रशिक्षण की अग्निपरीक्षा से गुजरना होता है।
एक कुत्ते को टे्रंड करने में सरकार का लाखों रुपये खर्च हो जाता है। नौ माह का लंबा और कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है। कुत्ते को इस तरह से तराशा जाता है कि वह हर परीक्षा में पास हो जाए। इसके बाद ही उसे जिले के लिए आवंटित किया जाता है।
बीते दिनों स्टेशन पर एक पुलिस अफसर के पालतू कुत्ते से चेकिंग पर काफी विवाद हुआ था। हकीकत तो यह है कि डाग स्क्वाड में शामिल करने के लिए कुत्तों को हैदराबाद के बाजार से खरीदा जाता है।
सीबीसीआईडी के अफसर की टीम बाजार जाकर कुत्तों की नस्ल देखकर खरीदारी करती है। ये भी ध्यान रखा जाता है कि उसकी उम्र एक वर्ष से अधिक नहीं होनी चराहए। इसके बाद कुत्ते को मध्यप्रदेश के ग्वालियर या फिर पंजाब के पंचकुला के ट्रेनिंग सेंटर भेज दिया जाता है।
इसके बाद उन्हें नौ माह की ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाता है। इसके बाद ही उन्हें जिलों को आवंटित किया जाता है। करीब एक साल तक जिलों में भी उन्हें ट्रेनिंग में रखा जाता है।
क्या होती है डाइट
सुबह नाश्ते में आधा किलो दूध और चार सौ ग्राम आटा दिया जाता है। जबकि शाम को आधा किलो मीट और आधा किलो हरी सब्जी व पौन किलो आधा खिलाया जाता है। सुबह शाम इन कुत्तों को घूमाया जाता और बीच बीच में चिकित्सक चेकअप भी कराया जाता है। बीच बीच में ट्रेनिंग के लिए ग्वालियर भी भेजा जाता है।
ट्रेकर स्वान(मानव गंध)
नाम रीमा (फीमेल)
नस्ल - लेव्राडोर
जन्म तिथि-- 15-3-2008
नियुक्ति तिथि 16- 12- 2008
स्निफर श्वान(विस्फोटक)
नाम मार्शल (मेल)
नस्ल- लेब्रा डोर
जन्म निथि 20- 7-2011
नियुक्ति तिथि 20-6-2012