चंदे से बंगाल में फल-फूल रहा आतंक का धंधा
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पश्चिम बंगाल की धरती पर पनप रहा आतंकवाद दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इसके लिए फंडिंग कहां से होती है।
बंगाल की धरती पर आतंकवाद की जड़ों को गहरा बनाने के लिए पैसा कहां से और कैसे आता है, अब यह एक अहम सवाल बनता जा रहा है। इन्हीं सवालों के जवाब के तौर पर यह बात भी सामने आने लगी है कि बंगाल की धरती पर व्यापारियों के चंदे से आतंक का धंधा चंगा हो रहा है।
असम के नलबाड़ी जिले से शुक्रवार रात असम पुलिस के विशेष दल द्वारा गिरफ्तार किए गए शाहनूर आलम से इस मामले में पूछताछ की जानी है।
शाहनूर आलम की गिरफ्तारी को बर्धवान ब्लास्ट मामले के सिलसिले में काफी अहम माना जा रहा है। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश ऑपरेटिव के अहम किरदार से जिरह करने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी यह स्पष्ट कर सकती है कि बंगाल में आतंक के कारोबार को फैलाने के लिए किस स्त्रोत से फंडिंग होती है।
27 नवंबर को बांग्लादेश के खुफिया विभाग के अधिकारियों ने काफी जांच पड़ताल के बाद बर्धवान ब्लास्ट मामले से जुड़ी अहम जानकारियां एनआईए से साझा की थीं। सूत्रों के मुताबिक उस बैठक में पैसों की फंडिंग पर भी सूचनाओं का लेनदेन हुआ था।
हवाला के जरिए बांग्लादेश में भेजा जाता है पैसा
प्राथमिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि कोलकाता में व्यापारियों से चंदे के जरिए पैसा इकट्ठा किया जाता है जिसका इस्तेमाल बंगाल और बांग्लादेश में आतंक के साम्राज्य को विस्तार देने में किया जाता है।
यह बात भी सामने आई है कि बांग्लादेश को भेजा जाने वाला पैसा हवाला के जरिए आता है। गंभीर बात ये है कि पैसे के इस प्रवाह में बांग्लादेश का एक बैंक भी शामिल है।
ढाका में एक सूत्र ने बताया कि चंदे के माध्यम से जो भी पैसा जुटाया जाता है वो इसी बैंक में जमा किया जाता है और इसके बाद ही इसे आतंकवादी गतिविधियों के लिए खर्च किया जाता है। सूत्र के मुताबिक पिछले 18 महीनों में बंगाल के जिहादी मॉड्यूल के लिए करीब 16 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं।
1.5 करोड़ रुपए से हथियार खरीदेंगे आतंकी
सूत्र के मुताबिक जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश ऑपरेटिव के सदस्य असम और बंगाल में करीब 1.5 करोड़ रुपए से हथियार और विस्फोटक सामग्री खरीदेंगे। सूत्र के मुताबिक जमात-उल-मुजाहिदीन के नेताओं को अच्छा खासा वेतन मिलता है।
बर्धवान ब्लास्ट के दौरान खगरागढ़ में मारे गए आतंकी ने बताया था कि उसे कुछ लाख रुपए बतौर वेतन मिलते थे।
बर्धवान हादसे की जांच के दौरान जांच अधिकारी कुवैत और सऊदी अरब के कुछ गैर सरकारी संगठनों के नामों के करीब भी पहुंच गए हैं। ये संगठन अलकायदा से निकटता के चलते अमेरिका में प्रतिबंधित किए जा चुके हैं।