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'शहरों के विकास मॉडल को पहाड़ों पर मत ले जाइए'

Wed, 31 Jul 2013 10:54 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 31 Jul 2013 10:54 PM IST
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towns development model not apply to mountains says rk pachauri

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित और जाने माने पर्यावरणविद डॉ. आर के पचौरी के मुताबिक शहरों के विकास मॉडल को पहाड़ों पर जस का तस लागू नहीं किया जाना चाहिए।

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पहाड़ों की अलग प्रकृति और जरूरतों को देखते हुए डॉ. पचौरी ने अलग विकास मॉडल की जरूरत पर जोर दिया।

डॉ. आर के पचौरी ने बुधवार को अमर अजाला के संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड आपदा, जलवायु परिवर्तन के असर समेत कई अहम विषयों पर उन्होंने अपनी राय और अनुभव अमर उजाला से साझा किए।
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उत्तराखंड आपदा पर अपना नजरिया पेश करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा का कारण सिर्फ जलवायु परिवर्तन न होकर अंधाधुंध विकास और जरूरत से ज्यादा मानवीय दबाव भी है।
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नदियों के किनारे निर्माण से पैदा होने वाले खतरों पर जोर देते हुए पचौरी ने कहा कि, बड़े-बड़े होटल, मकान और टूरिस्ट कॉम्पलेक्स नदियों के किनारे तैयार किए गए हैं। नदियों के पानी में सिल्ट (गाद) बहकर आती है। जंगलों के कटने के कारण सिल्ट की समस्या बढ़ गई है।

लिहाजा जब बाढ़ आती है तो नदी के किनारे पानी को संभाल नहीं पाते और सब कुछ बह जाता है। अगर नदी के आस-पास निर्माण न किया जाता तो आपदा के खतरों को टाला जा सकता था।

सड़क निर्माण पर भी उन्होंने कहा कि, ज्यादातर सड़कें नदियों के ठीक ऊपर बनाई गई हैं। जब भी सड़कों का रख रखाव होता है तो उस दौरान निकला मलबा सीधे नदियों में पहुंच जाता है। यह स्थिति लंबे समय में खतरनाक साबित होती है।

डॉ. पचौरी के मुताबिक नियमों की अनदेखी भी आपदा की बड़ी वजह बनी। अगर निर्माण के नियमों, दूरगामी नतीजों और जनता के हितों पर समय रहते ध्यान दिया जाता तो इतना विनाश नहीं होता।


पचौरी के मुताबिक यह घटनाएं भविष्य के लिए सबक हैं।

विकास की परिभाषा बदलने की जरूरत
पचौरी के मुताबिक विकास का मकसद लोगों के जीवन स्तर को सुधारना और उसे सुरक्षित बनाना होना चाहिए। विकास का खाका ऐसे खींचा जाए जिससे नुकसान कम हो और भविष्य भी सुरक्षित रहे। इसके लिए उन्होंने मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की भी आवश्यकता जताई।

स्वास्थ्य पर भी भारी जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वैश्विक मौसम, ग्लेशियरों और पर्वतों पर तो दिख ही रहा है। लेकिन इसका सबसे खतरनाक पहलू मानव स्वास्थ्य है। आर के पचौरी के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण संक्रामक रोगों में बढ़ोतरी हो रही है। संक्रमण के फैलने की रफ्तार और उसका असर पहले से ज्यादा बढ़ा है।

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