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सीबीएसई रिजल्टः चुनौतियों को हरा इन्होंने जीत लिया जहां
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 28 May 2013 03:48 PM IST
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आसमान उन्हीं को नसीब होता है जिनके सपनों में उड़ान होती है। और आज के युवाओं ने अपने सपनों में उड़ सकने लायक पंख भी लगा लिए हैं।
ये पंख हैं सीबीएसई बोर्ड 2013 का रिजल्ट। इस रिजल्ट आने के बाद जैसे पूरे देश में जश्न है। और भारत का युवा एक बार फिर जीत की नई सीढ़ी को छूने की खुशी मना रहा है।
और स्टीव ज़ॉब्स की बात जैसे फिर अपने आप को दुहरा रही है कि यदि कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति हो तो आपको कोई नहीं रोक सकता। आपको हम मिला रहे हैं सीबीएसई बोर्ड के टॉपर्स और ऐसे स्टूडेंट्स से जिन्होंने चुनौतियों को स्वीकारते हुए अपनी जीत पक्की की।
सीबीएसई 12वीं: ये हैं यूपी और उत्तराखंड के टॉप-10 होनहार
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सोपानः पूरे देश का टॉपर
सीबीएसई ने सोमवार को 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। पिछले साल के रिजल्ट की तुलना में 1.91 फीसदी के इजाफे के साथ इस बार 82.10 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। दिल्ली के लांसर कान्वेंट पब्लिक स्कूल के कॉमर्स स्ट्रीम से पारस शर्मा ऑल इंडिया टॉपर रहे हैं।
सीबीएसई की परीक्षा में 99% अंक पाने वाले सोपान जबलपुर के रहने वाले हैं। उन्हें मैथ्स, फिजिक्स, केमेस्ट्री और कम्प्यूटर साइंस में 100 में से 100 अंक पाने वाले सोपान को इंग्लिश में 95 अंक प्राप्त हुए हैं। महज़ पांच अंकों से चूके सोपान अगर इंग्लिश में पूरे नंबर पा जाते तो शत-प्रतिशत अंकों वाला रिकॉर्ड ब्रेक हो जाता।
सोपान का कहना है कि वे बस रोज 3-4 घंटे पढ़ाई करते थे। रोज पढ़ाई करने के कारण ही अच्छा रिजल्ट आया है।
सोनालीः हादसा भी नहीं तोड़ सका हौसला
रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण पिछले सात साल से व्हील चैयर और बिस्तर पर जिंदगी गुजारने वाली सेक्टर तीन निवासी सोनाली ने अपने मजबूत इरादों के बूते सीबीएसई की कक्षा 12 वाणिज्य संकाय की परीक्षा में 96.06 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
जीवन को सकारात्मक नजरिए से देखने वाली सोनाली ने बताया कि 13 जून 2006 को छत से गिरने के कारण रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी। उसके बाद वह अपने पैरों पर चल-फिर नहीं सकी। हादसे के समय वह छठी कक्षा में थी। उसका कहना था कि आगे एमबीए करना चाहती हैं। उसने बताया सही मायनों में तो इस हादसे के बाद मैं जिंदगी के प्रति ज्यादा सकारात्मक हो गई हूं।
सांवलारामः मन की आंखों से पाई मंजिल
गांव रड़वा बाखासर निवासी सांवलाराम पर आज पूरे गांव को गर्व है। जन्म से दृष्टिबाघित सांवलाराम ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा नब्बे फीसदी से अघिक अंकों से उत्तीर्ण की है। अब उसे लगने लगा है कि वह भी अपनी मंजिल पा सकता है।
उसका सपना प्रशासनिक सेवा में जाने का है। लालाराम की दस संतानों में से दूसरे नंबर का सांवलाराम दृष्टिबाघित होने के कारण बचपन में पढ़ाई नहीं कर सका। करीब बारह साल की उम्र में स्वयंसेवी संस्था 'श्योर' की ओर से आयोजित शिविर में भाग लेने के बाद उसे पढ़ाई की लगन लगी।
अंकित सैनीः मुश्किल परिस्थितियों के बीच कामयाबी
दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 स्थित राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय से कॉमर्स में अंकित सैनी ने 97.4 फीसदी अंक लेकर राजधानी के सरकारी स्कूलों में प्रथम स्थान हासिल किया है। द्वारका स्थित शाहबाद मोहम्मदुपर गांव के छोटे से घर में अंकित चार भाइयों के साथ रहते हैं।
पिता सात साल से पैरालाइज होने के चलते बिस्तर पर हैं, जबकि मां परिवार के पालन-पोषण के लिए लोगों के घरों में चौका-चूल्हा करती है। सोमवार को अंकित के स्कूल टॉप करने की खबर मिलते ही मां कभी बेटे को दुलारती तो कभी बिस्तर पर लेटे पति को मिठाई खिला रही थीं। आंखों में खुशी के आंसू थे। अंकित ने कहा कि मां ने बेहद दुख झेले हैं। उसका सपना है कि वह भी एक दिन अंबानी की तरह किसी बड़ी कंपनी का एमडी बने, ताकि मां के कर्ज व दर्द के बोझ को कम कर सके। बिना ट्यूशन के अंकित ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कॉमर्स वर्ग में टॉप किया है।
गरीबी आड़े नहीं आई
दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित सर्वोदय विद्यालय के ललित, शक्ति नगर स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंबर 2 की मोमिना शेख व शादी खामपुर स्थित सर्वोदय विद्यालय की तरुणा के पिता ऑटो चालक हैं। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले तीन छात्रों ने काबलियत से परिजनों का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
ललित ने साइंस में 96.2 फीसदी अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया है। उसका सपना डॉक्टर बनने का है। वहीं, ऑर्ट्स में मोमिना ने 95.2 फीसदी अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया है। मोमिना का सपना आईएएस बनने का है। जबकि वोकेशनल वर्ग में तरुणा 92.8 फीसदी अंक लेकर अव्वल रही है। तरुणा कहती हैं कि उसका सपना फाइव स्टार होटल की नौकरी मिलने के बाद मम्मी-पापा व पांचों भाई-बहनों को खुद खाना बनाकर खिलाने का है।
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ये पंख हैं सीबीएसई बोर्ड 2013 का रिजल्ट। इस रिजल्ट आने के बाद जैसे पूरे देश में जश्न है। और भारत का युवा एक बार फिर जीत की नई सीढ़ी को छूने की खुशी मना रहा है।
और स्टीव ज़ॉब्स की बात जैसे फिर अपने आप को दुहरा रही है कि यदि कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति हो तो आपको कोई नहीं रोक सकता। आपको हम मिला रहे हैं सीबीएसई बोर्ड के टॉपर्स और ऐसे स्टूडेंट्स से जिन्होंने चुनौतियों को स्वीकारते हुए अपनी जीत पक्की की।
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सीबीएसई 12वीं: ये हैं यूपी और उत्तराखंड के टॉप-10 होनहार
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सोपानः पूरे देश का टॉपर
सीबीएसई ने सोमवार को 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। पिछले साल के रिजल्ट की तुलना में 1.91 फीसदी के इजाफे के साथ इस बार 82.10 फीसदी छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। दिल्ली के लांसर कान्वेंट पब्लिक स्कूल के कॉमर्स स्ट्रीम से पारस शर्मा ऑल इंडिया टॉपर रहे हैं।
सीबीएसई की परीक्षा में 99% अंक पाने वाले सोपान जबलपुर के रहने वाले हैं। उन्हें मैथ्स, फिजिक्स, केमेस्ट्री और कम्प्यूटर साइंस में 100 में से 100 अंक पाने वाले सोपान को इंग्लिश में 95 अंक प्राप्त हुए हैं। महज़ पांच अंकों से चूके सोपान अगर इंग्लिश में पूरे नंबर पा जाते तो शत-प्रतिशत अंकों वाला रिकॉर्ड ब्रेक हो जाता।
सोपान का कहना है कि वे बस रोज 3-4 घंटे पढ़ाई करते थे। रोज पढ़ाई करने के कारण ही अच्छा रिजल्ट आया है।
सोनालीः हादसा भी नहीं तोड़ सका हौसला
रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण पिछले सात साल से व्हील चैयर और बिस्तर पर जिंदगी गुजारने वाली सेक्टर तीन निवासी सोनाली ने अपने मजबूत इरादों के बूते सीबीएसई की कक्षा 12 वाणिज्य संकाय की परीक्षा में 96.06 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
जीवन को सकारात्मक नजरिए से देखने वाली सोनाली ने बताया कि 13 जून 2006 को छत से गिरने के कारण रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी। उसके बाद वह अपने पैरों पर चल-फिर नहीं सकी। हादसे के समय वह छठी कक्षा में थी। उसका कहना था कि आगे एमबीए करना चाहती हैं। उसने बताया सही मायनों में तो इस हादसे के बाद मैं जिंदगी के प्रति ज्यादा सकारात्मक हो गई हूं।
सांवलारामः मन की आंखों से पाई मंजिल
गांव रड़वा बाखासर निवासी सांवलाराम पर आज पूरे गांव को गर्व है। जन्म से दृष्टिबाघित सांवलाराम ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा नब्बे फीसदी से अघिक अंकों से उत्तीर्ण की है। अब उसे लगने लगा है कि वह भी अपनी मंजिल पा सकता है।
उसका सपना प्रशासनिक सेवा में जाने का है। लालाराम की दस संतानों में से दूसरे नंबर का सांवलाराम दृष्टिबाघित होने के कारण बचपन में पढ़ाई नहीं कर सका। करीब बारह साल की उम्र में स्वयंसेवी संस्था 'श्योर' की ओर से आयोजित शिविर में भाग लेने के बाद उसे पढ़ाई की लगन लगी।
अंकित सैनीः मुश्किल परिस्थितियों के बीच कामयाबी
दिल्ली के द्वारका सेक्टर 10 स्थित राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय से कॉमर्स में अंकित सैनी ने 97.4 फीसदी अंक लेकर राजधानी के सरकारी स्कूलों में प्रथम स्थान हासिल किया है। द्वारका स्थित शाहबाद मोहम्मदुपर गांव के छोटे से घर में अंकित चार भाइयों के साथ रहते हैं।
पिता सात साल से पैरालाइज होने के चलते बिस्तर पर हैं, जबकि मां परिवार के पालन-पोषण के लिए लोगों के घरों में चौका-चूल्हा करती है। सोमवार को अंकित के स्कूल टॉप करने की खबर मिलते ही मां कभी बेटे को दुलारती तो कभी बिस्तर पर लेटे पति को मिठाई खिला रही थीं। आंखों में खुशी के आंसू थे। अंकित ने कहा कि मां ने बेहद दुख झेले हैं। उसका सपना है कि वह भी एक दिन अंबानी की तरह किसी बड़ी कंपनी का एमडी बने, ताकि मां के कर्ज व दर्द के बोझ को कम कर सके। बिना ट्यूशन के अंकित ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कॉमर्स वर्ग में टॉप किया है।
गरीबी आड़े नहीं आई
दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित सर्वोदय विद्यालय के ललित, शक्ति नगर स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंबर 2 की मोमिना शेख व शादी खामपुर स्थित सर्वोदय विद्यालय की तरुणा के पिता ऑटो चालक हैं। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले तीन छात्रों ने काबलियत से परिजनों का सिर गर्व से ऊंचा किया है।
ललित ने साइंस में 96.2 फीसदी अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया है। उसका सपना डॉक्टर बनने का है। वहीं, ऑर्ट्स में मोमिना ने 95.2 फीसदी अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया है। मोमिना का सपना आईएएस बनने का है। जबकि वोकेशनल वर्ग में तरुणा 92.8 फीसदी अंक लेकर अव्वल रही है। तरुणा कहती हैं कि उसका सपना फाइव स्टार होटल की नौकरी मिलने के बाद मम्मी-पापा व पांचों भाई-बहनों को खुद खाना बनाकर खिलाने का है।