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दिल्ली को भनक नहीं थी इशरत एनकाउंटर ऑपरेशन की
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
Updated Sat, 06 Jul 2013 01:43 AM IST
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इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में आईबी के संदिग्ध संयुक्त निदेशक राजेंद्र कुमार ने करीब चार महीने के इस ऑपरेशन की भनक दिल्ली में बैठे उच्च अधिकारियों को नहीं लगने दी।
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अब तक की जांच में ऐसे कोई कागजी सबूत नहीं मिले हैं, जिसे रिपोर्ट की शक्ल में राजेंद्र ने दिल्ली मुख्यालय को भेजी हो।
इस एनकाउंटर की स्क्रिप्ट स्थानीय स्तर पर खुद राजेंद्र कुमार और गुजरात पुलिस के डीआईजी डीजी बंजारा मिल कर लिख रहे थे। इस एनकाउंटर का मकसद तलाश रही सीबीआई को पूरे मामले में राजनीति कोण भी नजर आ रहा है।
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जानिए, क्या है इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर केस?
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इस मामले से नजदीक से जुड़े खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि राजेंद्र कुमार सिर्फ इशरत एनकाउंटर ही नहीं बल्कि गुजरात में इससे पहले कई और ऐसे काम कर चुके हैं।
अधिकारी के मुताबिक वह दौर था, जब दिल्ली, मुंबई सहित कई जगहों पर एनकाउंटर हो रहे थे। दिल्ली का अंसल प्लाजा एनकाउंटर उसी कड़ी में से एक था, जिस पर कई बार गंभीर सवाल खड़े हुए।
'नरेंद्र मोदी ने दिया था इशरत को मारने का आदेश'
अधिकारी ने बताया कि यही वजह थी कि उस समय सरकार ने इसका गंभीर संज्ञान लिया। घटना की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने उस वक्त के आईबी निदेशक केपी सिंह को रिटायरमेंट की तारीख के करीब दो महीने पहले ही छुट्टी पर जाने को कह दिया था।
अधिकारी ने बताया कि गुजरात में इससे पहले सोहराबुद्दीन शेख सहित कई विवादास्पद एनकाउंटर हो चुके थे। उन सभी को भी राजेंद्र और बंजारा की टीम ने ही अंजाम दिया था।
भाजपा ने मिलाए दिग्विजय के सुर में सुर
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के विवादित बयानों पर आए दिन पलटवार करने वाली भाजपा ने पहली बार उनके सुर में आधे सुर मिलाते हुए कहा है कि गृह मंत्रालय को साफ करना चाहिए कि इशरत जहां को लेकर सीबीआई, आईबी और एनआईए अलग-अलग सुरों में क्यों बोल रही हैं। साथ ही यह बताए कि डेविड हेडली ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनएआई) का क्या जानकारी दी थी।
पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह को फंसाने के लिए ही कांग्रेस के इशारे पर सीबीआई ने 2007 और 2009 में हलफनामे बदले। भाजपा हालांकि दिग्िविजय के इस बयान से सहमत नहीं है कि हेडली ने यह नहीं कहा कि इशरत जहां के आतंकियों से रिश्ते हैं।
अल्पसंख्यक वोटरों को लुभाने की तैयारी
जदयू इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले के बहाने बिहार में अल्पसंख्यकों को लुभाने की मुहिम में जुट गई है।
जदयू सांसद अली अनवर अंसारी ने इशरत को बिहार की बेटी बताते हुए कहा कि अब यह साबित हो गया है कि इशरत को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था।
पूरे मामले में मोदी और शाह की भी भूमिका थी। इसलिए केंद्र सरकार को इस घटना में इन दोनों नेताओं की भूमिका का खुलासा करना चाहिए। उन्होंने इस मामले को संसद में भी उठाने की घोषणा की।
‘इस केस में हम सभी पक्षों की जांच कर रहे हैं। मामले की तह तक पहुंचने के लिए हम एनआईए समेत अन्य सहयोगी जांच एजेंसियों की भी मदद ले रहे हैं। आईबी भी हमें जांच में मदद कर रही है।’--रंजीत सिन्हा, सीबीआई निदेशक