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एक चिट्ठी की वजह से आया भारतीय ट्रेनों में शौचालय

Wed, 24 Feb 2016 02:54 PM IST
Updated Wed, 24 Feb 2016 02:54 PM IST
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toilets in indian trains, special stories on unioun rail budget

भारत में रेल के डिब्बों में शौचालय लगाने के पीछे एक दिलचस्प वाकया है। कहा जाता है कि 1909 में पश्चिम बंगाल के एक यात्री ओखिल चंद्र सेन ने रेलवे स्टेशन को एक चिट्ठी लिखी थी।

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इसमें उन्होंने शिकायत की थी कि वह लघुशंका के लिए गए थे और इसी दौरान उनकी ट्रेन उन्हें छोड कर चली गई, लेकिन सेन की चिठ्टी के बाद सभी डिब्बों को इस सुविधा से जोडा गया।
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असल में पहले ट्रेनों में शौचालय नहीं हुआ करते थे और वर्ष 1891 में केवल फर्स्ट क्लास के डिब्बों को इस सुविधा से जोडा गया था।

कुछ इस तरह हुई पहली रेल यात्रा

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रेल में पहली यात्राः 16 अप्रैल 1853 को मुंबई के तत्कालीन बोरी बंदर स्टेशन (अब छत्रपति शिवाजी टर्मिनल) से ठाणे के लिए चली इस ट्रेन में लगभग 400 लोगों ने सफर किया। रेल का यह पहला सफर करीब 34 किलोमीटर लंबा था।

सबसे पुराना लोकोमोटिव इंजनः हैरिटेज ट्रेन ‘फेयरी क्वीन’ में लगे दुनिया के सबसे पुराने भाप इंजन का निर्माण 1855 में ब्रितानी कंपनी किटसन ने किया था। साल 1997 के बाद इस ट्रेन को हैरिटेज ट्रेन के रूप में चलाया जाने लगा।

टॉय ट्रेनः 4 जुलाई 1881 को पूर्वोत्तर में पहली बार आधिकारिक तौर पर यह ‘खिलौना रेल’ चली। ये ट्रेन दो फुट चौडे नैरो गेज ट्रेक पर दौडती है और इसे यूनेस्को से वर्ल्ड हैरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है। ये खिलौना ट्रेन भारत के सबसे ऊंचे रेलवे स्टेशन घूम तक जाती है।

ऑनलाइन टिकट बुकिंग की ऐसी हुई शुरुआत

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रेल नेटवर्क का बंटवाराः 14 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान का बंटवारा होने के साथ ही रेल नेटवर्क भी दोनों देशों के बीच बंट गया। अब भारत और पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन समझौता एक्सप्रेस चलती है। जबकि कोलकाता और ढाका के बीच मैत्री एक्सप्रेस 40 साल बाद फिर 2008 में शुरू हुई।

राष्ट्रीयकरणः 1951 से पहले भारतीय रेलवे के नेटवर्क में 40 से अधिक सिस्टम थे। आजादी के चार साल बाद इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। अभी यह लगभग 14 लाख कर्मचारियों के साथ दुनिया में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला विभाग है।

सबसे तेज ट्रेनः वर्ष 1988 में दिल्ली और भोपाल के बीच शताब्दी एक्सप्रेस शुरू की गई। इसकी रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मशती पर इसे शुरू किया गया था।

ऑनलाइन टिकट बुकिंगः तीन अगस्त 2002 को पहली बार भारतीय रेलवे ने घर बैठे इंटरनेट के जरिए टिकट बुक कराने की सुविधा शुरू की।

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