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टाइम्स न्यू रोमन नहीं, इस फॉन्ट से बचाएं लाखों

Sat, 29 Mar 2014 05:36 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 29 Mar 2014 05:36 PM IST
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To save money type in this not in time new roman font

आप ने ये तो सुना ही होगा कि पेपर के दोनो और प्रिंट करें या फिर पेपर रिसाइकल करें, तो इससे पर्यावरण के साथ-साथ पैसे भी बचा सकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कम्प्यूटर में टाइपिंग करते हुए यदि आप एक फॉंट बदल दें, तो आप सालाना लाखों रुपए बचा सकते हैं?

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जी हां, अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के 14 वर्षीय सुवीर मीरचंदानी ने अमेरिकी सरकार को ये सुझाव दिया है कि यदि वो टाइम्स न्यू रोमन में टाइप न करें, तो सरकार सालाना चार सौ करोड़ डॉलर बचा सकती है।
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छटवीं कक्षा में पढ़ने वाले सुवीर ने अपने स्कूल के साइंस प्रोजेक्ट के लिए एक नया प्रयोग किया और इस प्रयोग से उसने पाया कि सिर्फ एक फॉंट बदल दिया जाए तो प्रिंट में खर्च होने वाली स्याही 30 प्रतिशत तक बचाई जा सकती है।

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कुछ इस तरह किया प्रयोग

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सुवीर ने स्कूल से कुछ हैंडआउट्स जमा किए। पहले चरण में उसने ऐसे शब्दों को ढूंढ़ा, जो सबसे ज्यादा उपयोग किए जाते हैं। उसने पाया कि e,t,a,o और r ऐसे शब्द हैं, जो सबसे ज्यादा उपयोग किए जाते हैं।

इसके बाद उसने इन शब्दों को टाइम्स न्यू रोमन, गैरामंड, सेंचुरी गोथिक और कॉमिक संस फॉंट में टाइप किया और एक सॉफ्टवेयर की मदद से सुवीर ने जांचा कि ‌विभिन्न फॉंटों में कितनी स्याही खर्च होती है।

फिर उसने एक-एक शब्द की फांट साइज बढ़ाकर सभी फांटों में प्रिंट किया और जांचा कि किस फॉंट में कितनी स्याही खर्च होती है। उसने तीन बार इस प्रक्रिया को दोहराया।

अन्य फॉंट की जगह ये फॉंट करें प्रयोग

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सुवीर मीरचंदानी ने अपने प्रयोग से पाया कि अन्य फॉंट की तुलना में यदि गैरामंड फॉंट उपयोग किया जाए, तो ये कम स्याही खाता है। सुवीर के अनुसार, यदि उसका स्कूल इस फॉंट का उपयोग करना शुरू कर दे, तो स्कूल प्रिंट में लगने वाली स्याही का 24 प्रतिशत बचा सकता है। इसका मतलब है कि स्कूल सालाना 21 हजार डॉलर बचा सकता है।

मीरचंदानी का यह प्रयोग नये खोजकर्ताओं के प्रयोग छापने वाली पत्रिका 'जरनल फॉर इमरजिंग इनवेस्टिगेटर्स' में भी छपा। पत्रिका सुवीर के प्रयोग से इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने यह सुवीर को यह प्रयोग सरकार के सामने रखने की चुनौती दे दी।

सुवीर ने सरकारी कार्यालयों में प्रिंट किए गए दस्तावेजों पर यही प्रयोग पांच बार से ज्यादा किया और उसने यहां भी वही परिणाम पाए।

अमेरिकी सरकार को सुझाव

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दस्तावेजों के प्रिंट पर अमेरिकी सरकार सालाना 1.8 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करती है। सुवीर ने सरकार को बताया कि अगर वे गैरामंड फॉंट में टाइप करना शुरू कर दें, तो वे सालाना 30 प्रतिशत तक स्याही बचा सकते हैं। यदि सरकार इस फॉर्मूले को सिर्फ राज्य स्तर पर भी अपनाती है, तो चार सौ करोड़ डॉलर से भी ज्यादा बचा सकती है।

सरकारी संस्‍था जीएसए के डैन कु्ज ने सुवीर के प्रयोग की प्रशंसा की है। वे कहते हैं कि यदि सरकार ने इस आइडिया को अपना लिया, तो सरकार सालाना 300 करोड़ डॉलर से ज्यादा बचा सकती है।

हालांकि वे इस आइडिया को अपनाएंगे की नहीं, इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर सुवीर को पूरा विश्वास है कि उनका ये प्रयोग सरकार जरूर अपनाएगी और पर्यावरण के क्षेत्र में पर्यावरण संरंक्षण के लिए नया रास्ता साबित होगी।

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