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तृणमूल ने वोटिंग की मांग से किया किनारा
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 27 Nov 2012 12:33 AM IST
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तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एफडीआई के मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव का साथ नहीं देने वाले मुख्य विपक्षी गठबंधन एनडीए और वामदलों से सियासी बदला चुकाने का फैसला कर लिया है। सोमवार को सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस ने रिटेल में एफडीआई पर लोकसभा में वोटिंग कराने की एनडीए और लेफ्ट की मांग पर जोर न देने की बात कही।
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तृणमूल ने वोटिंग के नियम 184 के तहत बहस पर अड़ने के बजाय स्पीकर पर चर्चा कराने का फैसला छोड़ने का ऐलान कर जहां भाजपा-लेफ्ट को झटका दिया, वहीं उसके रुख से यूपीए सरकार को थोड़ी राहत की उम्मीद बंध गई है। सरकार ने संसद में एफडीआई पर वोटिंग के नियम के तहत बहस पर अडे़ विपक्षी दलों के साथ बने गतिरोध को दूर के लिए सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।
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इस बैठक में सभी दलों ने अपनी राय रखी और तृणमूल के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि एफडीआई ज्वलंत मुद्दा है और इस पर बहस होनी चाहिए। यह बहस किस नियम के तहत हो इसका फैसला स्पीकर को करना चाहिए। तृणमूल के इस रुख का संकेत साफ है कि वह भाजपा-लेफ्ट की एफडीआई पर वोटिंग की मांग पर कायम रहने के साथ नहीं है। जाहिर तौर पर तृणमूल के इस रुख को अविश्वास प्रस्ताव की अनदेखी करने के लिए भाजपा-लेफ्ट को दीदी का करारा जवाब माना जा रहा है।
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लोकसभा में तृणमूल संसदीय दल के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि उनकी पार्टी ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला कर एफडीआई पर अपना रुख साफ कर दिया था। लेकिन उसे सदन में समर्थन नहीं मिला। अब इस पर अविश्वास प्रस्ताव पेश हो या किसी नियम के तहत बहस हो, यह फैसला अध्यक्ष को ही करना चाहिए।
गौरतलब है कि मल्टी ब्रांड रिटेल में विदेशी निवेश का शुरू से विरोध कर रही सरकार की घटक रही तृणमूल ने इस मुद्दे पर यूपीए से नाता तोड़ लिया। शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर तृणमूल ने एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया। लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव पर ममता को बीजद को छोड़ किसी पार्टी का साथ नहीं मिला।