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हमें वहां मरने में कोई मजा नहीं आता: सेनाध्यक्ष

Sat, 16 Mar 2013 10:36 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sat, 16 Mar 2013 10:36 AM IST
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time not ripe for withdrawing afspa from jk says army chief

जम्मू-कश्मीर में लागू सेना के कठोर कानून अफस्पा (आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पॉवर एक्ट) को हटाए जाने की मांग को सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने सिरे से खारिज कर दिया है।

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उन्होंने राज्य में इस कानून को बरकरार रखे जाने की वकालत करते हुए कहा कि हमें वहां मरने में कोई म जा नहीं आ रहा है।

शुक्रवार को आयोजित इंडिया टुडे कन्क्लेव में उन्होंने कहा कि राज्य से इस कानून को हटाए जाने का अभी सही समय नहीं आया है। उन्होंने कहा कि इस मसले पर सरकार का कोई भी निर्णय राजनीति प्रेरित नहीं होना चाहिए।
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जनरल सिंह ने कहा कि अफस्पा कानून के मसले पर हम केवल सिफारिश कर सकते हैं। जब भी मुझसे पूछा जाता था तो मेरा कहना यही था कि यह समय इस कानून में किसी भी तरह से छेड़छाड़ का नहीं है।
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हमें इस कानून को राज्य से हटाना नहीं चाहिए। हमें स्थितियों पर नजर रखनी होगी। और किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले हमें सुरक्षा का ख्याल रखना होगा। देश हित को ध्यान में रखते हुए ऐसे फैसले लेने चाहिए।

इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।’ घाटी में इस कानून को हटाए जाने की मांग केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला, बेटे और राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत कई अलगाववादी संगठन भी करते रहे हैं।

सेनाध्यक्ष ने कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार आतंकी गतिविधियां अभी भी बरकरार हैं। घाटी में आतंकवादी रोधी भूमिका में सेना की मौजूदगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम लगातार अपने अधिकारियों और जवानों को खोते जा रहे हैं।

चूंकि देश चाहता है, इसलिए हम वहां पर हैं। हमें मरने में कोई मजा नहीं आ रहा है। यह बेहद जरूरी है। सेना राज्य में लंबे समय तक आंतरिक सुरक्षा अभियानों को चलाए जाने के पक्ष में नहीं है। मंगलवार को श्रीनगर में हुए ऐसे ही एक आतंकी हमले में सीआरपीएफ के कई जवान शहीद हो गए थे।


जब जनरल सिंह से पूछा गया कि वित्त मंत्री कहते हैं कि सरकार तो इस कानून को हटाना चाहती है, मगर सेना सरकार की इस बात से सहमत नहीं है, तो उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस तरह का कोई फैसला लेती है तो हम अपनी मौजूदा स्थिति को बदलने को तैयार हैं।

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