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तो ये हैं रेपो दर कम करने की तीन प्रमुख वजहें

Fri, 16 Jan 2015 09:03 AM IST
Updated Fri, 16 Jan 2015 09:03 AM IST
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three reasons of decreasing repo rate
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25 की कमी की है। ये कमी तुरंत प्रभाव से लागू की गई है। इसी के साथ अब रेपो रेट 8 से घटकर 7.75 फीसदी हो गई है।
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से रेपो रेट में कटौती करने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि यह आम जनता के लिए अच्छा संकेत है। इससे लोगों के पास पैसा बढ़ेगा, जिससे वे अपने खर्चे भी बढ़ा सकेंगे।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने कहा कि यह क्रेडिट सिस्टम को आसान बनाएगा और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की बैलेंस शीट भी पहले से बेहतर होगी।

रिजर्व बैंक की तरफ से की गई इस कटौती के मुख्य कारण इस प्रकार हैं-

महंगाई

जुलाई 2014 से महंगाई में कमी देखने को मिल रही है। रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि महंगाई में उम्मीद से अधिक गिरावट का मुख्य कारण सब्जियों और फलों की कीमतों में सितंबर से आ रही लगातार गिरावट आना है।
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साथ ही, इंटरनेशनल लेवल पर कमोडिटी की कीमतों में गिरावट ने भी इसमें मदद की है, जिसमें कच्चा तेल सबसे महत्वपूर्ण है। राजन ने कहा कि अभी काफी समय तक कच्चे तेल की कीमतें कम ही रहने वाली हैं।
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अपेक्षित महंगाई

three reasons of decreasing repo rate

अपेक्षित महंगाई इस समय लोगों के अनुकूल है। सितंबर 2009 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि छोटी अवधि और लंबी अवधि दोनों के लिए ही यह सिंगल डिजिट हो गई है।

जनवरी 2015 तक महंगाई 8 प्रतिशत से भी कम हो गई है। रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि इस समय की पॉलिसी के हिसाब से जनवरी 2016 तक महंगाई 6 प्रतिशत से भी कम हो जाएगी।

राजकोषीय घाटे का टारगेट

three reasons of decreasing repo rate

राजकोषीय घाटे के टारगेट को पूरा करना भी रिजर्व बैंक की तरफ से की गई इस कटौती का एक कारण है। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि सरकार राजकोषीय घाटे के टारगेट में डिफॉल्ट न करे, इसके लिए भरसक प्रयास किया जाएगा।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे का टारगेट 4.1 प्रतिशत रखने का आश्वासन दिया था, जिसे स्वीकार करते हुए रिजर्व बैंक की तरफ से यह कटौती की गई है।

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