फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   three possibilities of mulayam singh's third front

मुलायम का तीसरा मोर्चाः तीन संभावनाएं

Fri, 29 Mar 2013 12:18 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 29 Mar 2013 12:18 PM IST
विज्ञापन
three possibilities of mulayam singh's third front

समाजवार्दी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर तीसरे मोर्चे की संभावनाओं पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि अगली सरकार तीसरे मोर्चे की बनेगी।

विज्ञापन


उन्होंने कांग्रेस को धोखेबाज और चालाक लोगों की पार्टी बताया है। वे इन दिनों भाजपा नेताओं के तारीफों के पुल भी बांध रहे थे।

ऐसे में क्या 2014 लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बन सकती है? इस मुद्दे पर तीन संभावनाएं-

संभावना 1: क्षेत्रीय पार्टियों का गठबंधन


लोकसभा चुनावों के बाद यदि क्षेत्रीय पार्टियां एकजुट होती हैं तो मुलायम सिंह यादव का महात्वाकांक्षी तीसरा मोर्चा हकीकत बन सकता है।

केंद्र की राजनीति में पहले भी क्षेत्रीय दलों ने एकजुट होकर सरकार बनाने के प्रयास किए है। हालांकि इस बार ये संभव हो पाएगा या नहीं, ये कहना मुश्किल है।
विज्ञापन


फिलहाल जैसे राजनीतिक समीकरण हैं, उनके मुताबिक मुलायम सिंह यादव को तीसरे मोर्चे के लिए वाम दलों और तृणमूल कांग्रेस की एकसाथ जरूरत पड़ सकती है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक दूसरे के प्रतिद्वंद्वी वाम दल और ममता बनर्जी एक साथ आएंगे, ऐसी संभावना अभी तक तो नहीं दिख रही।

तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगतो रॉय भी तीसरे मोर्चे की संभावना से इनकार कर चुके हैं। वाम और तृणमूल जैसी ही समस्या मुलायम को जनता दल (युनाईटेड) और राष्ट्रीय जनता दल को एकजुट करने में आएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


अगर मुलायम इन प्रतिद्वंद्वी दलों की एकजुट करने में कामयाब होते हैं तो तीसरा मोर्चा संभव हो सकता है।

संभावना 2: बाहर से भाजपा का समर्थन

तीसरे मोर्चे के सरकार की दूसरी संभावना तब बनती है, जब क्षेत्रीय दलों के गठबंधन को भाजपा बाहर से समर्थन दे।

लोकसभा चुनावों के बाद यदि तीसरे मोर्चे सामने आता है और उन्हें बाहर से समर्थन की जरूरत पड़ती है तब ये स्थिति संभव है।

मुलायम सिंह यादव इन दिनों भाजपा नेताओं की तारीफों के पुल बांधकर ऐसे संकेत भी दे रहे हैं।

हालांकि मुलायम का यह दांव उन्हें मुश्किल में भी डाल सकता है।

सपा के वोट बैंक में बड़ा हिस्सा मुस्लिम मतदाताओं का है। ये वोटर लोकसभा चुनावों सपा का दामन छोड़ भी सकते हैं।

2009 में कल्याण सिंह को पार्टी में शामिल करने के बाद मुलायम ऐसा धोखा एक बार खा भी चुके हैं। ऐसे में वे भाजपा से नजदीकी दिखाएंगे, ये देखना दिलचस्प होगा।

संभावना 3: बाहर से कांग्रेस का समर्थन

केंद्र में तीसरे मोर्चे के सरकार की तीसरी संभावना कांग्रेस के बाहर से समर्थन के बाद बन सकती है। 1996 में त्रिशंकु लोकसभा आने के बाद इस प्रकार का प्रयोग हो भी चुका है।


उस समय जनता दल, समाजवादी पार्टी, तेलगुदेश पार्टी और वामदलों के गठजोड़ से बने संयुक्त मोर्चे को बाहर से समर्थन देकर कांग्रेस ने केंद्र में उनकी सरकार बनवाई थी।

हालांकि ये गठबंधन स्थिर सरकार देने में कामयाब नहीं हो पाया था और दो प्रधानमंत्री बदलने के बाद भी देश को मध्यावधि चुनाव का सामना करना पड़ा था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed