इन तीन वजहों से हुई कांग्रेस की करारी हार
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गरीब ग्रामीणों को रोजगार यानी मनरेगा और दो वक्त के भोजन की गारंटी की खाद्य सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा और न्याय के लिए सूचना का अधिकार जैसे अहम कानूनों ने ही यूपीए सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
पहले इस बात को अधिकारी कह रहे थे लेकिन अब इसे दबी जुबान से ही सही कांग्रेसी नेता भी सही मान रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यूपीए सरकार के महत्वाकांक्षी इन कानूनों ने सरकारी खजाने की हालत पतली कर दी।
कई दिग्गजों की हुई हार
जिसके चलते विकास की कई प्रमुख योजनाओं की प्रगति रुक गई। कांग्रेस के कई ऐसे दिग्गज नेता जो चुनाव हार गए हैं। उनका भी कहना है कि भ्रष्टाचार राज्यों में हुआ। लेकिन खामियाजा केंद्र की सरकार को उठाना पड़ा है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जिस मनरेगा ने वर्ष 2009 मे सरकार की सत्ता में वापसी कराई थी। वहीं 2014 में उसकी हार का प्रमुख कारण बन गई।
तीनों योजनाओं में बड़ा घोटाला
दरअसल मनरेगा के भारी भरकम बजट ने सरकारी खजाने को तो पलीता लगाया ही साथ ही जिन गरीब ग्रामीणों के लिए यह योजना चलाई जा रही है। उन्हें इसका लाभ भी नहीं मिला।
अभी भी मनरेगा कामगारों को न ही समय पर मजदूरी मिल रही है और जो मिलती भी है वह तय मानकों से कम होती है। यह स्थिति देश के सभी राज्यों में है। फर्जी मनरेगा कार्डों से हर महीने करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है।
खास बात यह है कि मनरेगा के महा घोटाले की जानकारी सभी को है। लेकिन वोट बैंक की वजह से सबकेमुंह बंद थे। यही कारण है कि इस बार के चुनाव में सरकार को करारी हार का सामना करना पड़ा।
कानून के बाद भी नहीं मिला अनाज
खाद्य मंत्रालय के अधिकारी मानते हैं कि भोजन का अधिकार कानून बनाकर सरकार ने भले ही गरीबों को भुखमरी से बचाने की पहल की हो। लेकिन कानून के बावजूद गरीबों को अनाज नहीं मिल रहा है।
यह स्थिति उन कांग्रेसी राज्यों की है जहां पिछले वर्ष यह कानून लागू किया गया था।
कानून लागू होने के बाद से गरीबों की हालत पहले से और ज्यादा खराब हुई है। पहले जहां प्रति परिवार 35 किलो अनाज मिलता था। उन्हें अब प्रति व्यक्ति की दर से सिर्फ 5 किलो अनाज ही मिल रहा है। लेकिन यह अनाज भी दो से तीन महीने में एक बार ही नसीब हो रहा है।
नौकरशाही में जबरदस्त नाराजगी
जबकि केंद्र से पहले के मुकाबले ज्यादा अनाज दिया जा रहा है। कमोवेश यही स्थिति सूचना का अधिकार कानून की भी है। इस कानून ने नौकरशाही को पंगु कर रखा है।
प्रत्येक विभाग में कम से कम 3 अधिकारी सिर्फ आरटीआई के जरिए पूछे गए सवालों के जबाव देने में ही लगे रहते हैं। इस कानून को लेकर नौकरशाही में जबरदस्त नाराजगी है। यूपीए की हार में यह भी एक कारण माना जा रहा है।