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'गैंगरेप के तीन आरोपी खुद को दोषी नहीं मानते'

Wed, 09 Jan 2013 08:46 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 09 Jan 2013 08:46 AM IST
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three accused of delhi gangrape not consider themselves guilty

राजधानी में युवती से गैंगरेप करने वाले पांच अभियुक्तों में से तीन ने कहा है कि वे इस मामले में दोषी नहीं हैं। इन आरोपियों की पैरवी करने वाले एक वकील ने दावा किया कि ये तीनों मुकदमे का सामना करेंगे।

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बताया जा रहा है कि मनोहर लाल शर्मा ने मंगलवार को तिहाड़ जेल जाकर तीनों आरोपियों से मुलाकात की और उनकी पैरवी के लिए सहमति ली।

गौरतलब है कि शर्मा ने सोमवार को साकेत कोर्ट में आरोपियों का मुकदमा लड़ने की इजाजत मांगी थी। मजिस्ट्रेट ने उनके निवेदन को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि पहले आरोपियों की सहमति लेकर आएं।
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उल्लेखनीय है कि इस मामले में वकील समुदाय ने गैंगरेप के किसी भी आरोपी की पैरवी नहीं करने की बात कही थी। लेकिन सोमवार को आरोपियों की कोर्ट में पेशी के दौरान मनोहर लाल शर्मा ने कहा कि वे मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर और राम सिंह का अदालत में बचाव करेंगे।
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शर्मा के इस कदम साकेत बार एसोशिएशन के सदस्यों ने विरोध किया और अदालत में ही नारेबाजी शुरु कर दी। सदस्यों ने वकील एमएल शर्मा के खिलाफ भी नारेबाजी की और उन्हें गैंगरेप के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने को कहा।

वकीलों के हंगामे के बाद अदालत ने गैंगरेप की सुनवाई बंद कमरे में करने का निर्णय लिया। इतना ही नहीं अदालत ने इस मामले से जुड़े समाचारों के प्रकाशन व चैनलों पर प्रसारण पर भी रोक लग दी।

साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल ने अपने फैसले में कहा कि अदालत का पूरा कमरा वकीलों व आम लोगों से पैक है। वे बाधा पैदा कर रहे हैं और कमरे में एक इंच भी जगह खाली नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिनका मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

अदालत ने कहा कि इन लोगों से कई बार बाहर इंतजार करने का आग्रह किया गया, मगर उन पर कोई असर नहीं पड़ा। कोई सुनने को तैयार नहीं है। यहां तक कि ये लोग रीडर व स्टेनो की सीट तक पहुंच गए।

जस्टिज काटजू ने की बार एसोशिएशन की आलोचना
भारतीय प्रेस परिषद के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मारकंडेय काटजू ने गैंगरेप के आरोपियों के वकील के खिलाफ नारेबाजी करने और उन्हें मुकदमा लड़ने से रोकने के कारण साकेत बार एसोशिएशन की आलोचना की।


उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 22 के मुताबिक गंभीर से गंभीर अपराध के आरोपी को भी अपना बचाव करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जिन वकीलों ने कोर्ट में नारेबाजी की उन पर अदालत की अवमानना की मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

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