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उत्तराखंड अपडेटः तीन दिन का राजकीय शोक घोषित
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 20 Jun 2013 07:40 PM IST
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उत्तराखंड सरकार ने राज्य में भारी बारिश-भूस्खलन और बाढ़ से हुई त्रासदी में जानमाल के भारी नुकसान के मद्देनजर तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।
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राज्य के सचिव (प्रशासन) एसएस नेगी ने कहा कि अचानक आई प्राकृतिक आपदा को देखते हुए राज्य में 20 से 22 जून तक राजकीय शोक रखा गया है।
इस दौरान सरकारी भवनों और संस्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा तथा राज्य में कोई उद्घाटन या मनोरंजन समारोह नहीं होगा।
कुदरत का गुस्सा
बारिश थमने और धूल के गुबार बैठने के बाद अंदाजा हुआ कि उत्तराखंड में कुदरत ने किस कदर गुस्सा उतारा है।
तबाही की तस्वीरें और वीडियो देखकर साफ है कि यह सब इतना जल्द हुआ होगा कि हजारों लोगों को बचने का कोई मौका नहीं मिला।
अब तक 22 हजार लोगों के बचाया जा सका है, लेकिन 70 हजार लोग अब भी फंसे हुए हैं। इन लोगों तक मदद पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।
उत्तराखंड की तबाही पर संपूर्ण कवरेज देखने के लिए क्लिक करें
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केदारघाटी में मौत के तांडव के बीच जिंदगी की जद्दोजहद जारी है। भूख-प्यास, पेयजल संकट, अंधेरा, खराब मौसम, संसाधनों का अभाव हजारों तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों का कड़ा इम्तिहान ले रहे हैं।
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लेकिन अब राहें भी खुलने लगी हैं। इस बीच सेना और वायुसेना के जवान कठिन हालात के बावजूद लोगों को बचाने में लगे हैं।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
गौरीकुंड में अस्थायी हेलीपैड का निर्माण कर लिया गया है। बृहस्पतिवार को राहत और बचाव के कार्य में काफी तेजी दिख रही है।
सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी के हजारों जवान बचाव कार्य में लगे हैं। बदरीनाथ व घांघरिया का भी बुधवार को हवाई सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है।
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राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को भी आपदा में मरने वालों की कोई निश्चित संख्या जारी नहीं की। अलबत्ता, मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने स्वीकार किया कि सैकड़ों लोग मारे गए हैं।
आशंका है कि हजारों लोग पानी के साथ ही बह गए और ऐसे ही कई बदनसीब मलबे और पहाड़ के नीचे दबे हैं। ऐसे लोग भी बहुत हैं, जो इस आपदा में जान बचाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन अब मौत की तरफ बढ़ रहे हैं।
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सरकारी आंकड़े के मुताबिक उत्तराखंड में अलग-अलग जगह अब भी 70 हजार लोग फंसे हुए हैं। अगर जल्दी राहत नहीं पहुंची, तो भोजन और दवा के इंतजार में इनमें से कई मर सकते हैं।
वीडियो देखें:- उत्तराखंड में तबाही का दिल दहलाने वाला मंजर
दरअसल, सरकार और प्रशासन खुद मान रहा है कि तबाही की चपेट में आए कई इलाकों तक अभी कोई राहत नहीं पहुंची है। ऐसे में साफ है कि भूखे-प्यासे मदद का इंतजार कर रहे हैं और अगर जल्दी कुछ नहीं हुआ, तो उन हजारों जान पर बन सकती है।
इस बीच आपदा विभाग ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें 1,000 मौतों की आशंका जताई गई है। राज्य की 500 सड़कें तबाह हो चुकी हैं।
पढ़ें:- उत्तराखंड में बचाए जाने के इंतजार में हजारों लोग
देहरादून से खाने के 20 हजार पैकेट लेकर हेलीकॉप्टर रवाना किए गए हैं। गुप्तकाशी और घनसाली के बीच प्रलय झेलने वाली 500 गाड़ियां निकाली गई हैं। आज सवेरे से सेना-एयरफोर्स के छोटे-बड़े 35 हेलीकॉप्टर को भी तैनात किया गया है।
हर्षिल, केदारघाटी, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब से हजारों तीर्थयात्री निकाले जा सकते हैं। केदारघाटी में कहीं लोग टापू पर फंसे हैं, तो कहीं जंगल में। वहां का बाजार गायब हो चुका है।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
आज वहां बड़ी मात्रा में खाने के पैकेट गिराए जाने की जरूरत भी है। उत्तरकाशी में गंगा घाटी में जो लोग होटल और ढाबों में शरण लिए हुए थे, वहां रसद खत्म हो गई, तो लोग गांवों की ओर पहुंचे। लेकिन अब गांवों में भी अनाज खत्म हो रहा है।
एनडीआरएफ की टीम भी केदारनाथ धाम पहुंचने की कोशिश कर रही है। तबाही वाली रात (रविवार रात से सोमवार सुबह तक) से केदारनाथ घाटी में मौजूद हजारों जिंदगियां कहां सिसक रही हैं, किसी को नहीं मालूम।
यहां की 90 धर्मशालाओं का कोई अता-पता नहीं है। लोग भूखे-प्यासे और बीमारी से मर रहे हैं, लेकिन इनका हालचाल लेने वाला कोई नहीं है।