हजारों सहायक उपनिरीक्षक फिर हो जाएंगे हेडकांस्टेबल
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पुलिस विभाग में हाल ही में हेडकांस्टेबल से सहायक सबइंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नत किए गए हजारों पुलिसकर्मी पदावनत किए जाएंगे। उनको वर्दी पर मिला सिंगल स्टार भी उतर जाएगा।
विभागीय प्रोन्नति में घोर अनियमितता की शिकायत के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर डीजीपी ने सर्कुलर जारी कर शासनादेश की मंशा के अनुसार ही प्रोन्नति देने का आदेश जारी किया है। इस स्थिति में नियम विरुद्ध प्रोन्नति वाले हजारों पुलिसकर्मी पुन: अपने मूल पद पर भेज दिए जाएंगे।
नवंबर 2014 में यूपी के विभिन्न जिलों में प्रोन्नत वेतनमान पाने वाले आरक्षियों और हेडकांस्टेबल (4200/4600 ग्रेड पे) को 15 सितंबर 1997 के शासनादेश के तहत सहायक उपनिरीक्षक के पद पर प्रोन्नति प्रदान की गई।
हाईकोर्ट में याचिका पर डीजीपी ने जारी किया सर्कुलर
गोरखपुर के कांस्टेबल रघुनंदन उपाध्याय ने भी प्रोन्नत वेतनमान के आधार पर सहायक उपनिरीक्षक के पद पर प्रोन्नति हेतु आवेदन किया। विभाग ने उनका प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया। रघुनंदन ने इसके विरुद्ध अधिवक्ता अनिल बिसेन की मार्फत हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रोन्नति का आदेश दिए जाने की मांग की है।
याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया तो पूरी प्रोन्नति प्रक्रिया ही कटघरे में आ गई। डीजीपी ने 25 फरवरी 2015 को सभी पुलिस महानिरीक्षकों और जिला पुलिस प्रमुखों को सर्कुलर जारी कर साफ कर दिया कि पुलिस विभाग में सहायक उपनिरीक्षक का कोई पद स्वीकृत नहीं है।
सर्कुलर में प्रोन्नति प्रक्रिया को 15 सितंबर 1997 के शासनादेश की मूल भावना के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया गया है। दूसरी ओर पुलिस मुख्यालय ने भी प्रोन्नति प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए जिला पुलिस प्रमुखों को पत्र भेज कर शासनादेश के अनुसार कार्य करने को कहा है।
पुलिस विभाग में सहायक उपनिरीक्षक का कोई पद स्वीकृत नहीं है। नियम विरुद्ध तरीके से प्रोन्नत किए गए कर्मचारी पुन: अपने मूल पद पर भेज दिए जाएंगे। भगवान स्वरूप- डीआईजी, इलाहाबाद रेंज