सिख विरोधी दंगाः 28 वर्ष वाद भी हरे हैं जख्म

चंदन जायसवाल/नई दिल्ली Updated Wed, 31 Oct 2012 02:17 PM IST
Those wounds of anti-Sikh riots still green
वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों को शायद कुछ लोग भूल चुके होंगे मगर इन दंगो की वजह से हजारों परिवारों को मिले घाव 28 बरस बाद भी हरे हैं। उन जख्मों की टीस वे हर दिन और हर पल महसूस करते हैं।

अपनी आंखों के सामने अपने बेटे और नाती को मौत के मुंह में जाते देखने वाले हरप्रीत स‌िंह उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि ‘कैसे भूलूं वह दिन...जब दंगा फैल रहा था और मैंने खुद अपने बेटे को समय से पहले दुकान से घर जाने के लिए कह दिया। सरोजनी नगर में हमारी कपड़े की दुकान थी और थोड़ी ही दूरी पर घर था।'

दंगों को याद करते उनकी आंखें नम हो जाती हैं... वे कहते हैं कि, 'मैं नहीं जानता था कि अपने बेटे और सात साल के नाती को मौत के मुंह में भेज रहा हूं। रास्ते में हंगामे से बचते हुए किसी तरह मैं जब घर पहुंचा, तो पूछने पर पता चला कि मेरा बेटा और नाती घर नहीं पहुंचे। मैंने पता करने की कोशिश की। काफी देर बाद मुझे पड़ोसियों ने बताया कि भीड़ ने दोनों को मार डाला।'


हरप्रीत कहते हैं, 'मैं आज तक नहीं समझ पाया कि आखिर हमारा कसूर क्या था। मैंने अपना बेटा और सात साल के नाती को खो दिया। एक बाप के लिए इससे बड़ा दुख और क्या होगा। मुकदमा व मुआवजा तो चलता रहता है, लेकिन मैंने जो खोया उसकी भरपाई कौन करेगा।'

आज से 28 साल पहले यानी 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे भारतीय इतिहास के सबसे काले अध्यायों में एक हैं। वह नरसंहार 31 अक्टूबर 1984 को सिख अंगरक्षक द्वारा इंदिरा गांधी की हत्या की प्रतिक्रिया के परिणाम स्वरूप हुआ था, जो एक और तीन नवम्बर 1984 के बीच देश भर में हजारों बेगुनाह लोगों की मौत और विध्वंस का सबब बन गया। उस दंगे में हजारों सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया।

एक अनुमान के मुताबिक उस दंगे में दस हजार से भी अधिक लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इस नरसंहार की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि तीन दिनों तक यह खूनी खेल देश के किसी सुदूर कोने में नहीं बल्कि राजधानी दिल्ली में चलता रहा।

कांग्रेस के शासन में जब सिखों को मौत के घाट उतारा जा रहा था, उनकी दुकानों को आग के हवाले किया जा रहा था, उनके घर लूटे जा रहे थे और उनकी पत्नियों के साथ बलात्कार किया जा रहा था, तब पुलिस और प्रशासन मूक दर्शक बनकर तमाशा देख रहा था।

इसे हर लिहाज से घृणित और जघन्य अपराध कहा जाएगा। 1947 के बाद आजाद भारत में आज तक इतनी बडी और भयानक घटना कभी नहीं हुई। यहां तक कि मुंबई और गुजरात के भी दंगे सिख विरोधी दंगों की तुलना में कमतर ही ठहरते हैं।

यह कटु सत्य है कि इस घटना को अंजाम देने वाले और उनके राजनीतिक संरक्षकों में से अधिकांशतः सजा से साफ बच गए हैं और उन्हें उनके कृत्यों के लिए कभी कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकेगा। तो क्या हमें इसे एक बुरा सपना मानते हुए भूल जाना चाहिए?


Spotlight

Most Read

India News Archives

पहली बार बांग्लादेश की धरती से विद्रोहियों के ठिकाने पूरी तरह से साफ: BSF

भारत की पूर्वी सीमा पर दशकों से चले आ रहे सीमा पार विद्रोही शिविरों को लेकर एक अहम जानकारी आई है।

18 दिसंबर 2017

Related Videos

बागपत के स्कूल में गैस लीक, 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ी

बागपत में गांव छपरौली के एक प्राथमिक स्कूल में गैस सिलेंडर लीक होने का एक मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक मिड डे मील के लिए आया सिलेंडर लीक हो रहा था, गैस लीकेज इतनी ज्यादा थी कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

6 मई 2017

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper