फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   this village does not have electricity

देश के इस गांव में है कुंआरों की फौज, वजह आपको चौंका देगी

Sat, 26 Sep 2015 03:00 PM IST
Updated Sat, 26 Sep 2015 03:00 PM IST
विज्ञापन
this village does not have electricity

देश को आजाद हुए 68 साल हो गए हैं। इस बीच काफी विकास हुआ है, यहां तक कि भारत भी चांद तक का सफर सफलता पूर्वक तय कर चुका है, लेकिन यूपी और हरियाणा की सीमा पर बसा एक गांव ढिक्का टपरी आज भी बिजली की राह देख रहा है।

विज्ञापन


कहने में यह अजीब सा लगता है, लेकिन सच है कि बिजली न होने से लोग अब इस गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से भी कतराने लगे हैं, यहां तक कि रिश्तेदारों ने भी किनारा कर लिया है।

विज्ञापन


ऐसा नहीं है कि गांव वाले चुप बैठे हैं, उन्होंने जनप्रतिनिधि से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। इसके बावजूद गांववालों ने हिम्मत नहीं हारी है और उन्हें उम्मीद है कि एक न एक दिन उनका गांव रोशन जरूर होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


हरियाणा की जद में बसा गांव ढिक्का टपरी है तो उत्तर प्रदेश का हिस्सा, मगर यमुना पार होने के कारण भौगोलिक समस्या की वजह से आज तक गांव का विद्युतीकरण नहीं हो सका है।

हरियाणा भी नहीं देता बिजली

this village does not have electricity

वहीं हरियाणा भी गांव को बिजली देने को तैयार नहीं है। गांव से सटा हरियाणा का गांव नाहरपुर बिजली से चकाचौंध है। दोनों गांवों के बीच में मात्र आठ फुट का रास्ता है।

ऐसे में पड़ोसी गांव में रात-दिन बिजली होने और अपने गांव में आज तक बिजली न पहुंचने की टीस ग्रामीणों के दिलों में जगह कर गई है। कई साल पहले सरकार की ओर से गांव में करीब दस सोलर स्ट्रीट लाइट लगवाई गई हैं, जो रात के करीब 11 बजे तक ही काम करती हैं।

उसके बाद गांव में अंधेरा छा जाता है। ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने आज तक इसके लिए आवाज नहीं उठाई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों और अधिकारियों से लेकर हरियाणा सरकार तक से बिजली देने की गुहार लगाई, मगर उनकी आवाज को हमेशा अनसुना कर दिया गया।

अच्छी बात यह है कि उन्होंने बिजली पाने के लिए अपनी मुहिम जारी रखी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि आज नहीं तो कुछ दिन बाद उनका गांव भी बिजली से जगमग होगा।

गांव से हो रहा पलायन

this village does not have electricity

जैसे-जैसे गांव के लोग सक्षम हो रहे हैं, वैसे-वैसे वहां से पलायन भी कर रहे हैं। हालांकि गांव आर्थिक रुप से काफी संपन्न हैं, मगर, बिजली नहीं होने के कारण लोग दूसरे शहरों का रुख कर रहे हैं।

गांव के कई ऐसे युवक हैं, जो बाहर पढ़ाई करने गए और फिर वहीं नौकरी लगने के बाद वहीं बस गए। अब गांव का रुख करने से कतराते हैं। धीरे-धीरे लोग गांव छोड़ कर दूसरी जगहों पर बसने भी लगे हैं।

गांव ढिक्का टपरी में छह सौ से सात सौ के बीच परिवार रहते हैं, जिनमें तीन हजार के करीब आबादी है। यहां 1500 से अधिक मतदाता हैं, मगर आज तक सभी राजनीतिक दलों ने यहां के मतदाताओं का इस्तेमाल किया।

ग्रामीणों ने बताया कि दावेदार उनके गांव में अनेक बार विद्युतीकरण कराने के वादे कर गए, मगर जीतने के बाद कोई लौटकर नहीं आया। नेताओं के इस व्यवहार से ग्रामीण आहत हैं।

विद्युतीकरण का सामान है, इच्छाशक्ति नहीं

this village does not have electricity

कुछ साल पहले बसपा सरकार में विद्युतीकरण की कवायद हुई थी। उस वक्त गांव में खंभे लगे थे और ट्रांसफार्मर आदि सामान पहुंचाया गया था। मगर, सरकार बदलने के बाद अफसरों ने भी बेरुखी कर दी।

अब गांव की खाली जमीन पड़े विद्युतीकरण के कीमती सामान जंग खा रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि हमारी परेशानी का हल 15 मिनट में हो सकता है, मगर अफसरों में इच्छाशक्ति नहीं है।

ऐसे हो सकती है समस्या हल

इस गांव में विद्युतीकरण के दो विकल्प हैं और इसके जरिए आसानी से गांव में बिजली पहुंच सकती है। सरसावा से यमुना के रास्ते पोल लगाकर गांव में बिजली पहुंचाई जा सकती है।

चिलकाना के गांव गयासुद्दीनपुर और सोंधेबॉस में भी ऐसे ही विद्युतीकरण किया गया है। दूसरा विकल्प यह है कि राज्य सरकार अपने स्तर से हरियाणा सरकार से बात करे। यूपी सरकार गांव में विद्युतीकरण करवा दे और हरियाणा से बिजली आपूर्ति करा दे।

जारी रहेगा हमारा आंदोलन

this village does not have electricity

गांव के विरेंद्र, महिपाल, हरदीप, जसवंत, शंभू, विजय, रमेश और प्रवीण का कहना है कि बिजली नहीं होने से गांव के बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है। युवाओं के विवाह तक नहीं हो पा रहे हैं।

लड़की वाले रिश्ता करने से साफ इंकार कर देते हैं। पीने के पानी की टंकी तक नहीं है। बिजली नहीं होने कारण खेती भी घाटे का सौदा हो गयी है। हर किसान को महंगा डीजल फूंककर सिंचाई करनी पड़ती है।

गांव के लोग कहते हैं कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता चुनाव बाद गांव का रूख भी नहीं करते हैं। यदि गांव का विद्युतीकरण नहीं होता तो वे आगामी पंचायत चुनावों का बहिष्कार करेंगे।

अब इनकी भी सुनिए

this village does not have electricity

गांव में विद्युतीकरण के लिए कई सालों से एकजुट होकर प्रयास जारी है। वर्ष 2011 में पूरे गांव की कोशिशों के चलते विद्युतीकरण का सामान लगाया गया। मगर, अफसरों की हीलाहवाली रही और सरकार बदल गई। इसके बाद हम अपनी मांग लेकर चक्कर काट रहे हैं, मगर कोई सुनवाई ही नहीं है।
हर्षवर्धन चौहान, ग्राम प्रधान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन पर गांव के लोगों ने अपनी समस्या रखी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय से उस प्रार्थना पत्र पर आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किया गया है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से मेरी बात हुई है। बहुत ही जल्द गांव में विद्युतीकरण कर कार्य किया जाएगा।
राघव लखनपाल शर्मा, सांसद

इस संबंध में बिजली निगम के अफसरों से बात की गई है। गांव में विद्युतीकरण के लिए हम दो तरफा प्रयास कर रहे हैं। यमुना से बिजली की लाइन के अलावा हरियाणा सरकार से संपर्क साधा गया है। तीन महीने के अंदर गांव में बिजली पहुंचाने की कोशिश है।
पवन कुमार, जिलाधिकारी

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed