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इस बार कुछ बदले-बदले से नजर आ रहे हैं राजनाथ
नई दिल्ली/हरीश लखेड़ा
Updated Fri, 15 Feb 2013 07:23 PM IST
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह इस बार कुछ बदले-बदले से दिख हैं। इस बार वे पहले से ज्यादा नरम नजर आ रहे हैं और सभी को साथ लेकर चल रहे हैं। भाजपा की कमान थामे हुए उन्हें अभी एक माह भी नहीं हुआ है और वे दो बड़े फैसले ले चुके हैं।
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पहला फैसला गुटबाजी से जूझ रहे राजस्थान की कमान वसुंधरा राजे को सौंप दी। राजे के साथ पिछली बार अध्यक्ष रहते हुए उनका विवाद हो गया था। उत्तराखंड में उन्होंने हाईकमान की पसंद की बजाए पार्टी के बहुमत को ध्यान में रखकर तीरथ सिंह रावत को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया, जबकि गडकरी के कार्यकाल में तय हो चुका था कि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को प्रदेश की कमान सौंपी जाएगी।
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कोश्यारी को राजनाथ खेमे का ही माना जाता है, लेकिन उन्होंने कोश्यारी की बजाए बहुमत का ध्यान रखा, ताकि विवाद की गुंजाइश न बचे। चूंकि उन्हें संघ का भी पूरा समर्थन मिला है, इसलिए वे तेजी से महत्वपूर्ण फैसले कर रहे हैं।
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राजनाथ भी जानते हैं कि भाजपा में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम अभी भले ही सबसे आगे हो, लेकिन केंद्र में मोदी की ताजपोशी इतनी आसान नहीं होगी। केंद्र में अगली सरकार यदि एनडीए की बनती है तो प्रधानमंत्री पद का विवाद तूल पकड़ेगा।
माना जा रहा है कि राजनाथ मानते हैं कि उनकी निर्विवाद छवि ही उनकी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक की राह आसान करेगी, जैसा कि पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में अंतिम समय में हुआ, जब नितिन गडकरी की जगह उन्हें कमान सौंप दी गई।
राजनाथ अब अपनी टीम बनाने में जुटे हैं। इसके लिए लगभग सभी बड़े नेताओं से विचार-विमर्श कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पिछले कार्यकाल की कमियों को ध्यान में रखकर ही वे आगे बढ़ रहे हैं।
यहां तक कि वे उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में छत्तीस का आंकड़ा रखने वाले मुरली मनोहर जोशी से मिलने चले गए और बाकायदा उनसे आशीर्वाद लिया। वे संदेश देना चाहते हैं कि इस बार वे सभी को साथ लेकर चलने के इच्छुक हैं।
दरअसल, राजनाथ जानते हैं कि उनके सामने चुनौतियों के पहाड़ हैं। एक ओर आंतरिक गुटबाजी के बीच वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं के साथ आगे चलना है तो दूसरी ओर पार्टी को अब नौ राज्यों के साथ ही लोकसभा चुनाव के लिए तैयार करना है।