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मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है सरकारी वकील का बयान

Fri, 26 Jun 2015 09:19 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 26 Jun 2015 09:19 AM IST
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this new govt came, I have been told to go soft on accused

मालेगांव केस से जुड़़ी सरकारी वकील रोहिणी सालियान ने कहा है कि केन्द्र में नई सरकार बनने के बाद से उन पर आरोपियों के प्रति नरमी बरतने का दबाव डाला जा रहा है।

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अंग्रेजी अखबार The Indian Express से साक्षात्कार में कहा है कि केंद्र में नई सरकार आने के कुछ दिनों बाद उन्हें एनआईए के अधिकारी की तरफ से फोन आया।

अधिकारी चाहता था कि रोहिणी उनसे मिलकर बात करें क्योंकि वह फोन पर बात नहीं करना चाहता था। रोहिणी ने बताया कि वो अधिकारी उनसे मिलने आया और उनसे कहा कि उन्हें हिन्दू उग्रवादियों के प्रति नरमी बरतनी चाहिए।
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आधिकारिक तौर पर मुझे निकाले एनआईए

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ये मामला इस महीने सामने आया जब बीते 12 जून को मामले की सुनवाई थी। उन्हें उसी एनआईए के अधिकारी ने फिर कहा कि उसके वरिष्ठ अधिकारी यह नहीं चाहते कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से वो इस केस की सुनवाई में शामिल हों।

उनकी जगह अब सुनवाई के लिए नया वकील नियुक्त किया जाएगा। 68 वर्षीय सालियान जे.जे शूटआउट, बोरिवली जबल मर्डर, भरत शाह मर्डर केस सहित मुलुंड ब्लास्ट जैसे केस लड़े थे।

सालियान ने यह भी कहा कि उस अधिकारी का यह साफ कहना था कि हमें हमारे पक्ष में फैसला नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं यह चाहती हूं कि एनआईए मुझे इस केस से आधिकारिक तौर पर निकाल दें ताकि जरूरत पड़ने पर मैं दूसरे मामले देख पाउं।

ये है पूरा मामला

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मालेगांव ब्लास्ट 29 सितंबर 2008 को हुआ था। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी और 79 लोग घायल हुए थे। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ परत दर परत लोगों के नाम सामने आने लगे।

इस मामले में मुख्य आरोपी मनोहर सिंह, साध्वी प्रज्ञा, और कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित सहित 12 लोग गिरफ्तार हुए थे। मालेगांव ब्लास्ट्स के समय ही गुजरात के मोडासा में भी ब्लास्ट हुए थे।

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