{"_id":"edb5e006248f2f8b5e868b2bfda24052","slug":"this-narendra-says-to-voters-do-not-vote-me","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ये उम्मीदवार बोला, मुझे वोट मत दो प्लीज","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
ये उम्मीदवार बोला, मुझे वोट मत दो प्लीज
Updated Tue, 22 Apr 2014 01:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर कोई जीतने के लिए मैदान में उतरता है। लेकिन ये मामला कुछ अलग सा है। बनारस से चुनाव लड़ रहा ये उम्मीदवार जीतने नहीं बल्कि हारने की तैयारी कर रहा है। ये प्रत्याशी बनारस की जनता से पुरजोर अपील कर रहा है कि प्लीज मुझे वोट मत देना।
बनारस की लोकसभा सीट से खड़े हुए नरेंद्र घर घर जाकर वोट न देने की अपील कर रहे है। नाम पर मत जाइए, ये भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी नहीं बल्कि नरेंद्र नाथ दुबे हैं जो हारने का विश्व रिकार्ड बनाना चाह रहे हैं।
विज्ञापन
बनारस की लोकसभा सीट से खड़े हुए नरेंद्र घर घर जाकर वोट न देने की अपील कर रहे है। नाम पर मत जाइए, ये भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी नहीं बल्कि नरेंद्र नाथ दुबे हैं जो हारने का विश्व रिकार्ड बनाना चाह रहे हैं।
विज्ञापन
एक ही डर, वोट न मिल जाए
नरेंद्र को इस बात से बहुत उत्सुकता हो रही है कि नरेंद्र मोदी के साथ ईवीएम में उनका भी नाम लिखा होगा। उन्हें डर है कि नरेंद्र मोदी के नाम के भ्रम में उनके खाते में कुछ वोट न आ जाएं।
नरेंद्र पेशे से वकील हैं और चाहते हैं कि हर बार की तरह वो हारें और उनके नाम हार का विश्व रिकार्ड बन जाए।
नरेंद्र पेशे से वकील हैं और चाहते हैं कि हर बार की तरह वो हारें और उनके नाम हार का विश्व रिकार्ड बन जाए।
खुद किसे देंगे अपना वोट
नरेंद्र का कहना है कि उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनावों में भी वो खड़े हुए थे। नरेंद्र बताते है कि उस समय सबसे कम वोट पाने की खातिर उन्होंने अपना वोट भी खुद को नहीं दिया।
नरेंद्र के अनुसार ऐसा कोई प्रत्याशी नहीं होगा जो एक भी वोट न पाए क्योंकि अपना और अपने परिवार का वोट तो हर प्रत्याशी को मिलता है।
नरेंद्र के अनुसार ऐसा कोई प्रत्याशी नहीं होगा जो एक भी वोट न पाए क्योंकि अपना और अपने परिवार का वोट तो हर प्रत्याशी को मिलता है।
बस एक ही बात का है अफसोस
नरेंद्र को अफसोस है कि वो पिछले राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ खड़े नहीं हो पाए थे। नरेंद्र ने कहा कि उनका नामांकन केवल इस आधार पर रद्द हो गया कि उनके 50 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर गलत पाए गए थे।
नरेंद्र बताते हैं कि उन्हें हार का स्वाद पता है। वो चाहते हैं कि हर बार खड़े हों और हार जाएं। जीत नहीं तो हार का रिकार्ड बनाना भी जीत की ही तरह है।
नरेंद्र बताते हैं कि उन्हें हार का स्वाद पता है। वो चाहते हैं कि हर बार खड़े हों और हार जाएं। जीत नहीं तो हार का रिकार्ड बनाना भी जीत की ही तरह है।