भाजपा की हालिया जीत में इन धुरंधरों का अहम रोल
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जम्मू-कश्मीर और झारखंड में भाजपा के पक्ष में आए परिणामों का श्रेय बेशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दिया जा रहा है। लेकिन, परदे के पीछे कई ऐसे चेहरे हैं जो ऐसा परिणाम दिलाने के लिए दिन-रात एक किए हुए थे।
मोदी और भाजपा के आला नेताओं ने सभाएं कर बेशक जनता में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया, लेकिन जमीन पर रणनीति को अंजाम देने में पार्टी के संगठन मंत्रियों की भूमिका अहम रही।
भाजपा संगठन महामंत्री रामलाल तीन महीने से जम्मू-कश्मीर में डेरा डाले हुए थे। वहीं सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह और त्रिवेंद्र सिंह रावत ने झारखंड की कमान संभाल रखी थी।
राज्यों के संगठन महामंत्री भी योजना में शामिल
इन दोनों के अलावा पार्टी ने दूसरे राज्यों के संगठन महामंत्रियों को भी रणनीति का हिस्सा बनाया था। जम्मू-कश्मीर को भाजपा ने दो हिस्सों में बांट रखा था। जम्मू क्षेत्र की कमान जहां महेंद्र पांडे के हाथों में थी, तो घाटी की रणनीति को राम माधव अंजाम दे रहे थे।
झारखंड की रणनीति को अंजाम देने के लिए प्रदेश प्रभारी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सूबे को पलामू, छोटा नागपुर, कोयलांचल, कलेहान और संथाल परगना सरीखे पांच हिस्सों में बांट रखा था।
पलामू की कमान उत्तर प्रदेश के महेंद्र सिंह, कोयलांचल की हृदयनाथ सिंह, संथाल परगना की उत्तराखंड के धन सिंह रावत, छोटा नागपुर की बिहार के संगठन मंत्री नागेंद्र और कोल्हान की राजेंद्र पांडे के हाथों में थी।