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विधानसभा चुनावों में दिखेगा तीसरा मोर्चा!
हिमांशु मिश्र/दिल्ली
Updated Sat, 26 Oct 2013 01:51 AM IST
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भले ही 2014 के आमचुनाव से पहले तीसरे मोर्चे के गठन की संभावना नहीं दिख रही हो, मगर इस दिशा में प्रयास शुरू हो चुके हैं।
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वामदलों की अगुवाई में कुछ गैरएनडीए-गैरयूपीए दल सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे विधानसभा चुनावों में एक मंच पर आ गए हैं।
वामदलों के साथ जद(यू), सपा, जद(एस) और कुछ राज्यों के छोटे दलों ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। हालांकि जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां इन दलों का आधार नहीं है। फिर भी इसे तीसरे मोर्चे के गठन के प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
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जद-यू अध्यक्ष शरद यादव का कहना है कि महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गैरयूपीए-गैरएनडीए दलों को जोड़ने की कोशिश हो रही है। तीसरे मोर्चे के गठन पर 30 अक्तूबर को होने वाले धर्मनिरपेक्षता बचाओ सम्मेलन में चर्चा की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि इस सम्मेलन में इन दलों के नेता एक मंच पर जुटने वाले हैं।
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव वाम दलों की अगुवाई में कुछ गैरयूपीए-गैरएनडीए दल मिलकर लड़ेंगे। छत्तीसगढ़ में भाकपा, माकपा, जद-यू, गोंडवाणा गणतंत्र पार्टी, स्वाभिमान मंच और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी एक साथ चुनाव मैदान में कूदेंगी।
वहीं, राजस्थान में भाकपा, माकपा, सपा, जद-यू, जद-एस ने मिलकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। जद-यू ने गोंडवाणा गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में चुनाव मैदान में उतरने की रणनीति बनाई है। दिल्ली और मिजोरम के लिए प्रयास जारी है।
खास बात यह है कि जिन राज्यों में इन दलों के बीच समझौता हुआ है, वहां इनका कोई विशेष जनाधार नहीं है। इसके बावजूद इस प्रयास को 2014 के आमचुनाव से पूर्व गैरयूपीए-गैरएनडीए दलों को एकजुट करने का प्रयोग माना जा रहा है।
माकपा सूत्रों का कहना है कि 30 अक्तूबर के सम्मेलन में तीसरे मोर्चे के गठन पर चर्चा होगी। वामदल चाहते हैं कि भले ही तीसरा विकल्प चुनाव के बाद तैयार हो, मगर इससे पहले गैरएनडीए-गैरयूपीए दलों के बीच एकजुटता की कोशिश शुरू कर दी जानी चाहिए। इससे चुनाव के बाद जरूरी पड़ने पर इन दलों को एक मंच पर लाने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।