फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   third front exercise

तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद शुरू

Mon, 23 Sep 2013 12:04 AM IST
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली Updated Mon, 23 Sep 2013 12:04 AM IST
विज्ञापन
third front exercise

भाजपा की ओर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद बदली राजनीतिक परिस्थितियों में फिर से तीसरे मोर्चे की जमीन तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है।

विज्ञापन


गैर एनडीए-गैर यूपीए गठबंधन की जमीन तैयार करने की पहल हमेशा की तरह इस बार भी वाम दलों ने की है। माकपा महासचिव प्रकाश करात अगले महीने के अंत तक धर्म निरपेक्षता के बहाने सभी दलों की बैठक बुला कर इस संबंध में व्यापक चर्चा करना चाहते हैं।
विज्ञापन


इसी सिलसिले में करात ने दो दिन पूर्व जद-यू अध्यक्ष शरद यादव से मुलाकात की थी। रविवार को टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू और शरद यादव की मुलाकात इसी योजना का हिस्सा थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


नायडू के करीबी नेताओं का कहना है कि शनिवार को भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से हुई मुलाकात महज तेलंगाना मसले पर केंद्रित थी। इस मुलाकात को नायडू की राजग में शामिल होने की संभावना के तौर पर देखा जा रहा था।

मोदी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी तय होने से पहले तक वाम दल तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर उदासीन रुख अपनाए हुए थे।

यहां तक कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह के बार-बार इस दिशा में प्रयास शुरू करने के अनुरोध को भी वाम दलों के नेताओं ने अनसुना कर दिया था। इनकी योजना चुनाव के बाद तीसरे मोर्चे की जमीन खड़ा करने की थी।

मगर मोदी के आगमन से वाम दलों के नेता अचानक सतर्क हो गए हैं। इनका मानना है कि मोदी के आगमन के बाद चुनाव के सांप्रदायिकता बनाम धर्म निरपेक्षता का रूप ले लेने से तीसरी ताकतों को घाटा और कांग्रेस को लाभ हो सकता है।

यही कारण है कि करात ने अचानक इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया है। चूंकि भाजपा से संबंध टूटने के बाद शरद यादव बार-बार धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होने की बात करते रहे हैं, इसलिए करात ने इस सिलसिले पर सबसे पहले उनसे ही चर्चा की।

करात की इस सिलसिले में बीजद, जेवीएम और जेडीएस नेताओं से भी बात हुई है। माकपा के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि तीसरे मोर्चे के गठन का प्रयास शुरू हो चुका है।

योजना अक्तूबर में गैर यूपीए-गैर एनडीए दलों की बैठक बुला कर स्थिति के आकलन की है। मोर्चा बन पाएगा या नहीं, यह बैठक के बाद ही तय होगा।

उक्त नेता का कहना था कि वाम दल नहीं चाहते कि लोकसभा चुनाव में महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे हवा हो जाएं और इसका फायदा कई जगह पर कांग्रेस ले जाए। हालांकि वर्तमान परिस्थिति में गैर यूपीए-गैर एनडीए ताकतों को एक साथ लाना बेहद मुश्किल है।


शरद भले ही तीसरे मोर्चे की संभावना टटोल रहे हैं, मगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कांग्रेस से गठबंधन की संभावना को खत्म नहीं करना चाहते।

इसके अलावा नीतीश तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी की फेडरल फ्रंट बनाने की योजना का भी मुख्य हिस्सा हैं। मुश्किल यह है कि गैर यूपीए-गैर एनडीए दलों में भी भारी मतभेद हैं।

मसलन सपा-बसपा, द्रमुक-अन्नाद्रमुक, टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस, राजद और जदयू जैसे प्रमुख दल एक मंच पर साथ नहीं आ सकते।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed