जानिए, घर खरीदने का सही तरीका, नहीं होगी परेशानी
एक इंसान की जिंदगी में घर का होना जितना जरूरी है, आज के समय में इसे खरीदना उतना ही मुश्किल भी है। घर खरीदने में इंसान की कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। बहुत से लोग घर खरीदने में जल्दबाजी कर देते हैं और अपने जीवन की एक बड़ी पूंजी गलत जगह खर्च कर देते हैं। घर खरीदते वक्त सिर्फ कुछ बातों का ध्यान रख कर आप अपनी जमा पूंजी को सही जगह पर निवेश कर सकते हैं।
बजट का निर्धारण कर लें
मौजूदा समय में अधिकतर लोग होम लोन लेकर घर खरीदना पसंद करते हैं। होम लेकर लेकर घर खरीदना सही भी होता है, लेकिन कितना लोन लें, इसका निर्धारण कर लेना बहुत जरूरी है।
कोई बैंक आपको किसी घर की कीमत का 80 प्रतिशत तक लोन दे सकता है, लेकिन आपको कितने रुपए तक का फ्लैट लेना चाहिए इसे पहले निश्चित कर लें।
अगर आपका एकल परिवार है तो आपके लोन की मासिक किस्त कुल सैलरी के 45 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। मान लीजिए आपकी सैलरी 50 हजार रुपए प्रति माह है तो आपकी मासिक किस्त इसके 45 प्रतिशत 22,500 रुपए से अधिक न हो।
डाउन पेमेंट की व्यवस्था
घर के डाउन पेमेंट की रकम अपनी बचत पूंजी से ही अदा करें। डाउन पेमेंट के लिए बैंक से पर्सनल लोन का सहारा न लें। कई बार लोग डाउन पेमेंट करने के लिए बैंक से पर्सनल लोन ले लेते हैं, जिस पर ब्याज की दर 15-22 प्रतिशत तक होती है।
अगर आपके पास डाउन पेमेंट करने के लिए पर्याप्त पैसे न हों तो कुछ दिन घर खरीदने की प्लानिंग को टाल दें। जब डाउन पेमेंट करने के लिए पैसे जमा हो जाएं तो ही घर खरीदें।
अगर आप इसके लिए पर्सनल लोन का सहारा लेंगे तो बाद में आपको पर्सनल लोन और होम लोन की किस्तें एक साथ चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
किस्त समय पर जमा न होने पर आपके ऊपर बोझ बहुत अधिक बढ़ जाएगा, जिससे आप एक अजीब से कर्जजाल में भी फंस सकते हैं।
हिडेन कॉस्ट का रखें ध्यान
किसी भी बिल्डर से घर खरीदते समय कुल भुगतान की जाने वाली राशि का ब्रेकअप जरूर देख लें। फ्लैट खरीदने में स्टांप ड्यूटी शुल्क और रजिस्ट्रेशन, बिजली का मीटर, साल भर का मेंटेनेंस आदि भी शामिल होते हैं। घर खरीदते वक्त ध्यान रखें कि इन सभी के शुल्क घर की कीमत में शामिल हैं या नहीं।
अगर आप रीसेल वाले प्लैट खरीद रहे हैं तो आपको यह ध्यान रखना होगा कि कहीं सोसायटी के पैसे या कोई मेंटेनेंस चार्ज बाकी तो नहीं है। कई बार पेंटिंग और फर्नीचर आदि का खर्च बकाया रहता है, जिसे नए खरीदार को ही चुकाना पड़ता है।
लोकेशन पर भी दें ध्यान
घर खरीदते समय लोकेशन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। लोकेशन के हिसाब से घर की कीमत कम और ज्यादा होती है। अगर आपका बजट कम है तो आप शहर से थोड़ा दूर घर खरीद सकते हैं, लेकिन अगर आपका बजट सही है तो फिर आप शहर के अन्दर या उसके पास ही घर खरीद सकते हैं।
बहुत सारे लोग अपने बजट के हिसाब से लोकेशन का चुनाव करते हैं, लेकिन बहुत सारे लोग लोकेशन के हिसाब से बजट बनाते हैं। इन सभी के बावजूद घर खरीदते समय ध्यान रखना चाहिए कि आपके घर से आपका ऑफिस, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और शहर अधिक दूर न हो। इसकी वजह से आपके मासिक खर्चे बढ़ सकते हैं।
रेडी टू मूव घर लें या अंडर कंस्ट्रक्शन?
रेडी टू मूव प्रॉपर्टी अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के मामले थोड़ी महंगी होती है। अगर आपके सामने बजट की कोई दिक्कत न हो तो रेडी टू मूव प्रॉपर्टी लेना अधिक सही है।
वहीं दूसरी ओर, अगर आपके पास पैसे तुरंत उपलब्ध न हों और बजट भी कम हो, तो आप अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी का रुख कर सकते हैं।
अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी लेने से पहले यह जरूर देख लें कि बिल्डर का पिछला रिकॉर्ड कैसा है। वह समय पर फ्लैट डिलीवर कर पाता है या नहीं। ऐसा न करने पर आपको परेशानी झेलनी पड़ सकती है।