ये मुद्दे पैदा करेंगे अमेरिका के साथ कड़वाहट!
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अमेरिका ने भारत की मोदी सरकार के साथ रिश्ते सुधारने की कवायद तेज कर दी है। विदेश मंत्री जॉन केरी इसी मकसद से भारत यात्रा पर बुधवार को पहुंचे हैं। इसके बाद अगस्त में अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल भारत आ रहे हैं।
केरी मोदी सरकार के शीर्ष अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे आपसी रिश्तों की कठिन डगर आगे बढ़ने की कोशिश के साथ साथ ही सितंबर में वाशिंगटन में होने वाली राष्ट्रपति बराक ओबामा व नरेंद्र मोदी की मुलाकात के लिए भी तैयारी करेंगे।
इस उच्चस्तरीय मुलाकात के लिए काफी जमीनी तैयारी किए जाने की जरूरत है। हालांकि दोनों देशों के बीच रिश्तों में कड़वाहट पैदा करने वाला राजनयिक देवयानी खोबड़ागड़े के मामले की यादें अब कमजोर पड़ चुकी हैं। लेकिन इसके बावजूद भी भारत-अमेरिका के बीच व्यापार और कृषि के अलावा अभी भी कई ऐसे हैं मुद्दे हैं जिनके केरी और सुषमा स्वराज के बीच रणनीतिक बैठक में छाए रहने की उम्मीद है।
दोनों ही पक्षों ने मोदी-ओबामा शिखर सम्मेलन के लिए मुद्दों को सुलझाने के लिए काफी प्रयास किए हैं। दिलचस्प है कि अमेरिका ने भारत में अपनी राजदूत नैंसी पॉवेल के इस्तीफा देने के करीब दो महीने बाद भी अब औपचारिक रूप से नए राजदूत की नियुक्ति नहीं की है।
देवयानी विवाद के बाद रिश्तों में नहीं दिखी गर्मजोशी
पिछले साल सितंबर में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह अमेरिका यात्रा पर गए थे। देखा जाए तो देवयानी विवाद के बाद से ही दोनों देशों के बीच रिश्तों में गर्मजोशी नहीं दिखाई दी है। दोनों ही देशों ने रिश्तों में आई दरारों को भरने के कोई खास प्रयास नहीं किए हैं।
करीब 10 महीनों बाद उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है। ओबामा प्रशासन के मोदी विरोधी रुख की छवि को सुधारने के प्रयास राजदूत पॉवेल ने नहीं किए।
भाजपा के दिमाग में अमेरिका के मोदी विरोधी रुख की बात जरूर ताजा होगी। इस लिए वाशिंगटन में मोदी-ओबामा शीर्ष सम्मेलन के लिए फिर से एजेंडा तय करने के लिए काफी काम किए जाने की जरूरत है, जिससे सम्मेलन ने ठोस नतीजे निकल सकें।
अमेरिका भी चीन, रूस, जापान, यूके और फ्रांस की तरह मोदी सरकार से रिश्ते मजबूत करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भारत भेज रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ‘यह काफी आश्चर्य की बात है कि मोदी सरकार के लिए अमेरिका उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं आई। इसमें कुछ वक्त लगेगा, मुद्दे सुलझेंगे और कोई ठोस कार्रवाई व समझौते हो सकेंगे।’
इन मुद्दों पर हो सकती है कड़वाहट
दोनों देशों देशों के बीच अब भी कई मुद्दे हैं जो नए सिरे से कड़वाहट पैदा कर सकते हैं। पिछले साल अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि ने भारत के खिलाफ कथित रूप में अनुचित व्यापार के तरीके अपनाने के आरोप में जांच की, यह रिपोर्ट इस वर्ष नवंबर में सार्वजनिक हो सकती है।
डब्ल्यूटीओ पर भारत के रुख को लेकर भी अमेरिका नाराज है। असैन्य परमाणु करार की मंद गति को लेकर भी अमेरिका हताश है। अमेरिका को भारत के परमाणु जवाबदेही कानून पर आपत्ति हैं। भारत को एच1बी वीजा पर पाबंदियों और फार्मा सेक्टर पर अमेरिकी रवैये को लेकर ऐतराज है।
यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजस फ्रीडम की पिछले हफ्ते जारी रिपोर्ट भी भारत की आपत्ति का बड़ा मुद्दा हो सकती है। इस रिपोर्ट में भारत को अफगानिस्तान, तुर्की और रूस के साथ दूरी श्रेणी में डाला गया है।
अगस्त में आएंगे हेगल
अमेरिकी रक्षा मंत्री चक हेगल अगस्त में भारत आ रहे हैं। भारत ने हाल ही में अपने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की मंजूरी के संकेत दिए हैं। अमेरिका भारत के साथ सैन्य संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। अमेरिकी कंपनियां भारत के सैन्य क्षेत्र में निवेश की इच्छुक हैं और वे इसे एक बड़ा मौका मान रही हैं।