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मोदी के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां

Mon, 26 May 2014 08:33 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 26 May 2014 08:33 AM IST
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These are the challenges in front of Modi

राजनीतिक फलक पर दूर-दूर तक नरेंद्र मोदी को चुनौती देने वाला कोई नहीं रह गया है। वह भाजपा को बहुमत के पार लेकर गए हैं, उन्होंने आरएसएस के सपने को पूरा किया है।

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लेकिन क्या सत्ता का फलक भी वैसा ही है, जैसा राजनीति का। मोदी ने लोकसभा चुनाव में जनता को जो सपने दिखाए हैं, जो वादे किए हैं क्या उसे वो पूरा कर पाएंगे।
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मोदी आज देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले रहे हैं, इस मौके पर आकलन करते हैं उनकी चुनौतियों का-

पॉलिसी पैरालिसिस से उबरना

These are the challenges in front of Modi

पॉलिसी पैरालिसिस एक ऐसा मुद्दा था, जिसे यूपीए सरकार के कार्यकाल में कई बार उछाला गया। मनमोहन सिंह पर हमला करने के लिए पश्चिमी मीडिया ने इस हथियार का इस्तेमाल किया।

देश की विकास दर 5 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। मनमोहन सरकार कड़े फैसलों और वादों के बावजूद इसे 8 फीसदी के स्तर पर नहीं ले जा पाई। मोदी के सामने भी ये मुद्दा चुनौती बना रहेगा।

विकास की गति को तेज करने और देश में विनिवेश के माहौल को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी पैरालिसिस से उबरना बहुत जरूर है। मोदी ने भी चुनाव में ये मुद्दा जोरशोर से उछाला था। अब देखना है कि वे कोई ऐसा फैसला लेते हैं, जो जनता के ‌लिए कष्टकारी भी न और विकास को गति भी दे।

मोदी देंगे भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन

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भ्रष्टाचार को मु्द्दा‌ पिछले तीन सालों से जोरशोर से उठ रहा है। मादी ने भी लोकसभा चुनावों में भ्रष्टाचार के मुद्दे का जमकर इस्तेमाल किया। रॉबर्ट वाड्रा पर हमला, 2जी और कॉमनवेल्‍थ घोटाले का जिक्र उन्हों ने अपने भाषण में बार-बार किया।

देखना यह होगा कि सत्ता में आने के बाद वे इन मामलों का निपटारा कितनी तेजी से करते हैं और अपने शासनकाल में भष्टाचार को वे कैसे रोक पाते हैं। यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे, लेकिन राजग की पिछली सरकार के अनुभव भी भ्रष्टाचार के मामले कड़वे रहे।

तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज और भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण पर भ्रष्टचार के आरोप लगे थे।

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चीन को लेकर क्या सोचते हैं मोदी

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चीन के प्रति विदेश नीति भी मोदी के ‌लिए चुनौती होगी। चुनाव के दौरान अरुणाचल प्रदेश में अपनी सभा में नरेंद्र मोदी ने चीन के खिलाफ काफी उग्र बयान दिए थे। चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता।

कुछ दिन पहले अरुणाचल के दो एथलीट को चीन ने सिर्फ इसलिए अपने यहां आने की इजाजत नहीं दी थी क्योंकि उन्होंने नत्थी वीसा लेने से इनकार कर दिया था।

देखना ये होगा कि क्या मोदी अरुणाचल प्रदेश के लोगों के साथ होने वाले इस भेदभाव को दूर करने के लिए चीन पर दबाव बनाएंगे।

बांग्लादेश, नेपाल से मोदी के रिश्ते

These are the challenges in front of Modi

मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है, जिनमें बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हसीना भी शामिल हैं। हसीना के यूपीए सरकार के साथ अच्छे रिश्ते थे, लेकिन इसके बावजूद तीस्ता जल विवाद खत्म नहीं हो सका। क्या मोदी इस दिशा में कुछ करेंगे।

मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला को भी आमंत्रित किया है। राजशाही खत्म होने से पहले नेपाल को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में जाना जाता था, और संघ परिवार उसे अपने करीब पाता था।

बदले हुए नेपाल के साथ मोदी किस तरह की डील करेंगे। यदि कल को वहां फिर से माओवादी सरकार बनाने की स्थिति में आ गए तो मोदी सरकार का रुख उसके प्रति कैसा होगा।

म्यांमार को लेकर क्या होगा रुख

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म्यांमार को लेकर भारत का रुख बहुत अस्पष्ट रहा है। एक तरफ तो भारत का एक वर्ग वहां की लोकतंत्रवादी नेता आंग सान सू की के प्रति सहानुभूति जताता है, मगर यूपीए सरकार के दौरान जब वह भारत आई थीं. तो सरकार का रुख उनके प्रति ठंडा था।

म्यांमार की जुंटा सरकार के साथ भारत के रिश्ते आमतौर पर सामान्य हैं। इस रिश्ते को मोदी किस दिशा में ले जाएंगे।

खासकर इसलिए क्योंकि पिछली एनडीए सरकार के दौरान रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडीज न केवल सू के समर्थकों में थे, बल्कि म्यांमार के अनेक विद्रोही छात्र उनके सरकारी आवास में रहते थे।

भाजपा शासित राज्यों के घोटालों पर क्या होगा रवैया

These are the challenges in front of Modi

यूपीए सरकार के दौरान कोयला और 2 जी स्पेक्ट्रम जैसी प्राकृतिक संपत्ति के आवंटन को लेकर हुए घोटालों को लेकर भाजपा सबसे मुखर रही है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में टाटा इस्पात के साथ हुआ करार विवादों में है। वहां जमीन अधिग्रहण को लेकर आदिवासियों में नाराजगी थी। मोदी सरकार इस चुनौती से कैसे निपटेगी।

कुपोषण अब भी एक समस्या

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निवर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया था कि  देश के 45 फीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।

इस मामले में खुद गुजरात सरकार का रिकॉर्ड भी खराब रहा है। मोदी के मुख्यमंत्री रहते गुजरात सरकार ने पिछले वर्ष ही विधानसभा में स्वीकार किया था कि अकेले अहमदाबाद शहर में ही तकरीबन 55000 बच्चे कुपोषण से और तकरीबन साढ़े तीन हजार बच्चे अति कुपोषण का शिकार हैं।

मोदी सरकार इस चुनौती से कैसे निपटेगी।

नक्सलवाद से निपटने की चुनौती

These are the challenges in front of Modi

माओवादी मुद्दे से मोदी सरकार किस तरह निपटेगी। अब तो केंद्र में भी भाजपा की सरकार है और इस वक्त माओवादियों के सबसे बड़े गढ़ छत्तीसगढ़ में भी।

क्या मोदी सरकार बस्तर में माओवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जैसा कदम उठाएगी।

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