ये 272 लोग 67 सालों में पहली बार करेंगे वोट
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पूर्वोत्तर भारत के मेघालय राज्य की ईस्ट खालसी हिल्स जिले में एक तरफ 272 लोग खुश हैं, तो दूसरी तरफ सात हजार लोग उन्हें देख-देखकर अपना मन कचोट रहे हैं।
और हो भी क्यों न, क्योंकि ये 272 लोग पिछले 67 सालों में पहली बार लोकसभा चुनाव में वोट डालेंगे और जिले के 14 गांवों में रहने वाले अन्य सात हजार से भी ज्यादा लोगों को अभी भी यह हक नहीं मिला है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर रहने वाले इन लोगों में से सिर्फ 272 लोगों का चुनाव आयोग में पंजीकरण हुआ है और इन 272 लोगों ने सिर्फ हाल ही में हुए विधानसभा व क्षेत्रीय चुनावों में वोट किया है।
कौन हैं ये लोग?
भारत-बांग्लादेश सीमा पर 14 गांवों में बसे इन लोगों में 1500 वे लोग हैं, जो 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद यहां आकर बस गए थे। इनके अलावा यहां गारो जाति के लोग भी रहते हैं।
इनके पास अपनी कोई जमीन नहीं है। जिस जमीन पर ये खेती करते हैं, वो इन खेतों के मालिकों से किराए पर ली गई हैं और किराए के तौर ये खेतों से होनेवाले उत्पाद का एक हिस्सा मालिकों को देते हैं।
वोट करने वाले इन 272 लोगों को ही सिर्फ यहां का स्थायी अवासीय प्रमाणपत्र हासिल हो पाया है क्योंकि इसके लिए जरूरी दस्तावेज उनके पास थे। इन लोगों में से कुछ लोग ब्रिटिश काल से भी पहले से यहां रहते हैं, लेकिन सिर्फ जरूरी दस्तावेज न होने की वजह से वे कभी वोट नहीं कर पाए।
पता नहीं कौन है उम्मीदवार?
इस लोकसभा चुनाव में वोट करने वाले इन 272 लोगों में आधे से ज्यादा लोगों को यह भी पता नहीं कि उम्मीदवार कौन हैं?
जरूरी सुविधाएं भी यहां के क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है, जब कि यहां से मलेरिया और टीबी जैसे रोगों का वर्चस्व होने की कई रिपोर्टें आ चुकी हैं।
अतिरक्ति मुख्य निर्वाचन अधिकारी बी धर कहते हैं कि इन लोगों को अपने अधिकार पाने के लिए आगे आना होगा, तो ही इन्हें सभी अधिकार प्राप्त हो सकते हैं।