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चिदंबरम फिर बोले, सरकार को कोई खतरा नहीं
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Wed, 20 Mar 2013 12:59 PM IST
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डीएमके के समर्थन वापस लेने के बाद यूपीए सरकार ने आज कहा कि वह श्रीलंका में तमिलों के सामूहिक संहार के मामले में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमेरिका द्वारा लाए जा रहे प्रस्ताव को कठोर बनाने के लिए संशोधन लाएगी।
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वित्त मंत्री पी चिदंबरम, संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ और सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने आज सुबह एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। पी चिदंबरम में आज फिर दावा किया कि सरकार की स्थिरता को कोई खतरा नहीं है।
चिदंबरम ने बताया कि सरकार ने संसद में भी भारतीय तमिलों की भावनाओं के अनुरूप एक कड़ा प्रस्ताव पारित करने की सहमति जताई है लेकिन इसके साथ ही द्रमुक के साथ छोड़ने के बाद सरकार की स्थिरता पर उठ रहे सवालों को सिरे से नकार दिया और दावा किया कि उसे संसद में पूरा बहुमत हासिल है।
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चिदंबरम ने कहा कि सरकार श्रीलंका के तमिलों का पूर्ण समर्थन करती है। वे भारत के करीब हैं। उन्होंने कहा कि भारत श्रीलंका को कठोर संदेश देना चाहता है।
वित्तमंत्री ने उन मीडिया रिपोर्टो का खंडन किया जिनमें कहा गया है कि सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की जिनेवा स्थित सभा में शनिवार को लाए जाने वाले अमेरिकी प्रस्ताव को नरम बनाने में भूमिका निभाई है।
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उन्होंने कहा कि सरकार संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के मसौदे में संशोधन लाना चाहती है। कमलनाथ ने भी कहा कि संशोधन की शब्दावली को लेकर विचार विमर्श चल रहा है।
श्रीलंका के खिलाफ देश की संसद में एक कठोर प्रस्ताव लाए जाने की द्रमुक की मांग के बारे में चिदंबरम ने कहा कि संसद में भी इस आशय का प्रस्ताव लाए जाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत जारी है।
कमलनाथ ने कहा कि भारतीय तमिलों की भावना में सिर्फ संसद के प्रस्ताव में ही परिलक्षित हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव की शब्दावली को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद हो सकती है हालांकि यह प्रस्ताव तमिलों की भावनाओं के अनुरूप ही होगा।
मनीष तिवारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में कोई भी फैसला राष्ट्रीय हितों के आधार पर किया जाता है और संप्रग सरकार भी ऐसा ही करेगी।