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'देश में असहिष्णुता नहीं, यह केवल राजनीतिक मुद्दा'

Mon, 07 Dec 2015 06:22 AM IST
Updated Mon, 07 Dec 2015 06:22 AM IST
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there is no intolerance in  country, no need of to be feared

देश के मुख्य न्यायाधीश ने असहिष्णुता पर मचे बवाल को दरकिनार करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक मुद्दा है। लिहाजा देश में जब तक न्यायपालिका स्वतंत्र है और कानून का शासन बरकरार है तब तक किसी को डरने की जरूरत नहीं है।

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चीफ जस्टिस बनने के बाद पहली बार मीडिया से रूबरू हुए जस्टिस टी.एस. ठाकुर ने रविवार को एक अनौपचारिक बातचीत में असहिष्णुता से जुड़े सवाल पर कहा कि ये सियासी पहलू हैं। उन्होंने कहा, मैं एक ऐसे संस्थान का नेतृत्व करता हूं जो कानून के शासन का रखवाला है।
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लिहाजा हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा होगी और हम ऐसा करने में सक्षम भी हैं। न्यायपालिका हर व्यक्ति, समाज या समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।

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ये सियासी मामला

there is no intolerance in  country, no need of to be feared
चीफ जस्टिस ने कहा कि असहिष्णुता अपने-अपने नजरिये का मामला है और सियासी लोग इसका कैसे उपयोग करते हैं उस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा।

भारत एक बड़ा देश है और हमें किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं है। समाज के किसी भी वर्ग में कोई डर नहीं है।

उन्होंने कहा, हमारा अस्तित्व ही सहिष्णुता की बुनियाद पर है। देश के विकास के लिए सहिष्णु समाज का होना जरूरी है। मुझे नहीं लगता कि न्यायपालिका के रहते किसी को इस बात का डर होना चाहिए कि उसे देश से बाहर निकल दिया जाएगा या उसके साथ गलत बर्ताव किया जाएगा।

तभी हमारा विकास होगा

there is no intolerance in  country, no need of to be feared

हाल ही में एक लेखक और एक खास समुदाय के व्यक्ति की हत्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश है। ऐसे में कुछ  कोनों से सामाजिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं।

लेकिन न्यायपालिका के रहते किसी को डरने की जरूरत नहीं है। कुछ लोगों में पाशविक प्रवृति होती है लेकिन समाज में सहिष्णुता का माहौल बना रहना चाहिए। एक धर्म के लोगों को दूसरे धर्म के लोगों का सम्मान करना चाहिए। उन्हें बढ़ावा देना चाहिए।

तभी हमारा विकास होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत देश के सभी धर्म के लोगों का घर रह चुका हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के आदेशों से अपराध खत्म नहीं हो सकता। अपराध मानव जीवन का हिस्सा है और लोगों में टकराव तो होता रहेगा।

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