'देश में असहिष्णुता नहीं, यह केवल राजनीतिक मुद्दा'
देश के मुख्य न्यायाधीश ने असहिष्णुता पर मचे बवाल को दरकिनार करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक मुद्दा है। लिहाजा देश में जब तक न्यायपालिका स्वतंत्र है और कानून का शासन बरकरार है तब तक किसी को डरने की जरूरत नहीं है।
चीफ जस्टिस बनने के बाद पहली बार मीडिया से रूबरू हुए जस्टिस टी.एस. ठाकुर ने रविवार को एक अनौपचारिक बातचीत में असहिष्णुता से जुड़े सवाल पर कहा कि ये सियासी पहलू हैं। उन्होंने कहा, मैं एक ऐसे संस्थान का नेतृत्व करता हूं जो कानून के शासन का रखवाला है।
लिहाजा हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा होगी और हम ऐसा करने में सक्षम भी हैं। न्यायपालिका हर व्यक्ति, समाज या समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।
ये सियासी मामला
भारत एक बड़ा देश है और हमें किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं है। समाज के किसी भी वर्ग में कोई डर नहीं है।
उन्होंने कहा, हमारा अस्तित्व ही सहिष्णुता की बुनियाद पर है। देश के विकास के लिए सहिष्णु समाज का होना जरूरी है। मुझे नहीं लगता कि न्यायपालिका के रहते किसी को इस बात का डर होना चाहिए कि उसे देश से बाहर निकल दिया जाएगा या उसके साथ गलत बर्ताव किया जाएगा।
तभी हमारा विकास होगा
हाल ही में एक लेखक और एक खास समुदाय के व्यक्ति की हत्या
के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा देश है। ऐसे में कुछ कोनों से
सामाजिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं।
लेकिन न्यायपालिका के
रहते किसी को डरने की जरूरत नहीं है। कुछ लोगों में पाशविक प्रवृति होती है
लेकिन समाज में सहिष्णुता का माहौल बना रहना चाहिए। एक धर्म के लोगों को
दूसरे धर्म के लोगों का सम्मान करना चाहिए। उन्हें बढ़ावा देना चाहिए।
तभी
हमारा विकास होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत
देश के सभी धर्म के लोगों का घर रह चुका हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के आदेशों से अपराध खत्म नहीं हो सकता। अपराध
मानव जीवन का हिस्सा है और लोगों में टकराव तो होता रहेगा।