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...तो आखिर क्यों न हों दिल्ली में वारदात?
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 06 Feb 2013 11:15 PM IST
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दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने ठीक ही कहा है कि राजधानी में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। हों भी कैसे, क्योंकि दिल्ली में वीआईपी की सुरक्षा में आठ हजार पुलिसकर्मियों को व्यस्त रखा गया है। जबकि महज 3400 पुलिसकर्मी आपराधिक वारदातों की तफ्तीश के लिए तैनात किए गए हैं। खास बात यह है कि दिल्ली सरकार वीआईपी सुरक्षा पर प्रतिवर्ष 341 करोड़ रुपये खर्च करती है।
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सर्वोच्च अदालत में दायर किए हलफनामे में दिल्ली सरकार ने कहा है कि 376 विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा को केंद्रीय स्तर का दर्जा दिया गया है। जबकि जेड प्लस सुरक्षा भी कई लोगों को उपलब्ध कराई गई है। हालांकि वीआईपी की सुरक्षा के मद्देनजर इन लोगों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं।
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इसके अलावा 83 लोगों को क्षेत्रीय स्तर की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है जिनकी सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस घेरा डाले रहती है। हलफनामे के मुताबिक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के अलावा इन दोनों अदालतों के परिसर केंद्रीय स्तर की सुरक्षा के हवाले हैं और इसके लिए 7205 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इनमें 78 इंस्पेक्टर, 867 सब-इंस्पेक्टर तथा 4015 सिपाही हैं।
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दिल्ली पुलिस के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस के 2450 सुरक्षाकर्मी भी वीआईपी की खिदमत में लगे हुए हैं। राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा के लिए 844 पुलिसकर्मी तैनात हैं जबकि सालाना खर्च 38 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। दिल्ली की समूची ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए 5847 पुलिस वाले है। वीआईपी की सुरक्षा के लिए ब्लू और यलो बुक भी सीलबंद कवर में अदालत को सौंपी जाएगी।
दिल्ली सरकार ने हालांकि यह साफ किया है कि देश की राजधानी की कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी 64 हजार सुरक्षाकर्मियों के हवाले है। लेकिन हलफनामे में बताया है कि महज 3400 पुलिसकर्मी आपराधिक वारदातों की तफ्तीश के लिए तैनात हैं। बृहस्पतिवार को होने वाली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में उन अति विशिष्ट व्यक्तियों के नाम दिए जाएंगे जिनकी सुरक्षा में करोड़ों बहाए जा रहे हैं।
लाल बत्ती पर दी जानकारी
दिल्ली सरकार ने वाहनों पर लालबत्ती की नियमावली के बारे में भी अदालत को जानकारी दी है। वाहन में घूमती हुई लाल बत्ती के लिए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति, उप-प्रधानमंत्री, भारत के चीफ जस्टिस, लोकसभा स्पीकर, कैबिनेट मंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, पूर्व प्रधानमंत्री, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता तथा सुप्रीम कोर्ट के जज अधिकृत हैं।
दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और जज, विधानसभा के अध्यक्ष तथा कैबिनेट मंत्री भी घूमती हुई लाल बत्ती के साथ वाहन का का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसी बत्ती के वाहन का इस्तेमाल करने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त, कैग, लोकसभा और राज्यसभा के डिप्टी स्पीकर, केंद्र के राज्यमंत्री, योजना आयोग के सदस्य, अटार्नी जनरल, कैबिनेट सचिव आदि अधिकृत हैं।