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सुधारों पर फर्राटा भर रही सरकार, ब्रेक फेल का खतरा
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Oct 2012 01:51 AM IST
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तेज आर्थिक सुधारों को लेकर अब सरकार टकराव की राह पर आगे बढ़ गई है। पेंशन और बीमा क्षेत्र के दरवाजे भी विदेशी निवेश के लिए खोलकर सरकार के आगे के रास्ते पर सियासी चक्का जाम होने का खतरा बन गया है। बृहस्पतिवार को भले ही आर्थिक सुधारों के नए अध्याय को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। लेकिन इसे संसद के दोनों सदनों में पास कराना सरकार के लिए टेढ़ी खीर होगा।
कैबिनेट की बैठक में सरकार के सबसे बड़े सहयोगी दल द्रमुक के शामिल नहीं होने से इसकी भूमिका पहले ही बन गई है। आर्थिक सुधार के सरकार के फैसलों के खिलाफ राजनीतिक लामबंदी मजबूत होती दिख रही है। इस फैसले से गुस्साईं ममता बनर्जी ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने तक की धमकी दे दी है। तो मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी पेंशन और बीमा एफडीआई सीमा बढ़ाने के बिल का संसद में विरोध करने का ऐलान कर दिया है। वामपंथी पार्टियां तो पहले से ही इन सुधारों का विरोध कर रही हैं।
संसद में पेंशन और बीमा बिल का पारित कराना इस हालात में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए कठिन चुनौती है। लोकसभा में बहुमत होने के बावजूद सुधारों से जुड़े बिल की राह कठिन है। वहीं राज्यसभा में तो सरकार को बहुमत ही नहीं है। राज्यसभा में अंकगणित में फेल होने की वजह से बिल पारित कराना राजनीतिक तख्तापलट से कम बड़ी चुनौती नहीं है। मनमोहन ने आर्थिक सुधारों की गाड़ी पर सवार होकर टॉप गियर जरूर लगा दिया है मगर इससे सरकार के ब्रेक फेल होने का डर भी पैदा हो गया है।
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कैबिनेट बैठक से द्रमुक के एक मात्र कैबिनेट मंत्री एमके अलागिरी गैर मौजूद रहे। उनकी गैर मौजूदगी को सरकार के फैसलों को लेकर द्रमुक के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। द्रमुक ने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के फैसले के खिलाफ विपक्ष के देशव्यापी धरना प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। उधर, ममता प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए के साथ मिलकर सरकार के लिए नया सिरदर्द बनने जा रही हैं। सरकार के ताजा फैसलों को लेकर ममता ने कहा है कि यह सरकार देश को लूटने पर आमादा हो गई है। इसे संसद में रोका जाएगा।
वहीं अब सरकार के भविष्य की चाबी सपा और बसपा के हाथ में आ गई है। दोनों दलों के समर्थन की बदौलत सरकार इस भंवर से पार पा सकती है। उधर, कंपनी बिल को लेकर सरकार को भाजपा का साथ मिल सकता है। मगर पेंशन और बीमा बिल के मसले पर वह सरकार की टांग खींचने में किसी तरह की कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। आर्थिक सुधारों के सरकार के फैसलों को जायज ठहराने के लिए कांग्रेस सक्रिय हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा है कि सरकार ने देशहित में फैसला लिया है और उसे इसे मंजूर करवाने में संसद में कोई दिक्कत नहीं होगी।
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कैबिनेट की बैठक में सरकार के सबसे बड़े सहयोगी दल द्रमुक के शामिल नहीं होने से इसकी भूमिका पहले ही बन गई है। आर्थिक सुधार के सरकार के फैसलों के खिलाफ राजनीतिक लामबंदी मजबूत होती दिख रही है। इस फैसले से गुस्साईं ममता बनर्जी ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने तक की धमकी दे दी है। तो मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी पेंशन और बीमा एफडीआई सीमा बढ़ाने के बिल का संसद में विरोध करने का ऐलान कर दिया है। वामपंथी पार्टियां तो पहले से ही इन सुधारों का विरोध कर रही हैं।
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संसद में पेंशन और बीमा बिल का पारित कराना इस हालात में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए कठिन चुनौती है। लोकसभा में बहुमत होने के बावजूद सुधारों से जुड़े बिल की राह कठिन है। वहीं राज्यसभा में तो सरकार को बहुमत ही नहीं है। राज्यसभा में अंकगणित में फेल होने की वजह से बिल पारित कराना राजनीतिक तख्तापलट से कम बड़ी चुनौती नहीं है। मनमोहन ने आर्थिक सुधारों की गाड़ी पर सवार होकर टॉप गियर जरूर लगा दिया है मगर इससे सरकार के ब्रेक फेल होने का डर भी पैदा हो गया है।
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कैबिनेट बैठक से द्रमुक के एक मात्र कैबिनेट मंत्री एमके अलागिरी गैर मौजूद रहे। उनकी गैर मौजूदगी को सरकार के फैसलों को लेकर द्रमुक के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। द्रमुक ने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के फैसले के खिलाफ विपक्ष के देशव्यापी धरना प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। उधर, ममता प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए के साथ मिलकर सरकार के लिए नया सिरदर्द बनने जा रही हैं। सरकार के ताजा फैसलों को लेकर ममता ने कहा है कि यह सरकार देश को लूटने पर आमादा हो गई है। इसे संसद में रोका जाएगा।
वहीं अब सरकार के भविष्य की चाबी सपा और बसपा के हाथ में आ गई है। दोनों दलों के समर्थन की बदौलत सरकार इस भंवर से पार पा सकती है। उधर, कंपनी बिल को लेकर सरकार को भाजपा का साथ मिल सकता है। मगर पेंशन और बीमा बिल के मसले पर वह सरकार की टांग खींचने में किसी तरह की कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। आर्थिक सुधारों के सरकार के फैसलों को जायज ठहराने के लिए कांग्रेस सक्रिय हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा है कि सरकार ने देशहित में फैसला लिया है और उसे इसे मंजूर करवाने में संसद में कोई दिक्कत नहीं होगी।