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अमर उजाला के अभियान में झांसी के तीन चित्रकार चयनित
अमर उजाला, झांसी
Updated Sat, 04 Jan 2014 02:21 PM IST
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अमर उजाला के 'बेटी ही बचाएगी' अभियान के तहत हुई चित्रकला प्रतियोगिता में चुने गए टॉप 12 में झांसी के तीन चित्रकारों ने बाजी मारी।
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प्रतियोगिता में देश भर से 13,000 से भी ज्यादा प्रविष्टियां आईं थीं, इनमें से 12 श्रेष्ठ प्रविष्टियों को प्रसिद्ध चित्रकार अर्पणा कौर ने चुना। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में सभी चयनित 12 प्रविष्टियों का कैलेंडर भी प्रकाशित किया है।
प्रतियोगिता में झांसी से चुने गए तीन चित्रकारों में से दो सगे भाई हैं। ख्यातिलब्ध चित्रकार स्व. कालीचरण वर्मा के पौत्र आकाश वर्मा और उत्कर्ष वर्मा ने इस प्रतियोगिता में अपनी प्रविष्टियां भेजी थीं, जो श्रेष्ठता की कसौटी पर खरी उतरीं। आकाश और उत्कर्ष के पिता राकेश चंद्र वर्मा भी चित्रकार हैं।
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वह बताते हैं कि चित्रकला हमारे परिवार की परंपरा में शुमार है। पिता की बनाई इस परंपरा को उन्होंने निभाया और अब उनके पुत्र इसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आकाश ने बड़ोदरा आट्र्स कॉलेज से फाइन आट्र्स में स्नातक की पढ़ाई करने के बाद कॉमर्शियल आट्र्स में अपना कैरियर बनाया है।
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वर्तमान में वह फ्रीलांस काम कर रहे हैं। छोटा पुत्र उत्कर्ष कॉलेज ऑफ फाइन आट्र्स दिल्ली में बीएफए तृतीय वर्ष का छात्र है। उन्होंने बताया कि दोनों पुत्र इस उपलब्धि से बहुत प्रसन्न हैं। वह भी इस बात को लेकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि उनके पिता की परंपरा को दोनों पुत्र मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
अपनी कृति को लेकर आकाश ने बताया कि चित्र में उसने ताश के पत्ते दर्शाए हैं, जिसमें से क्वीन को एक किनारे रखा है और बाकी के ताश बिखरे पड़े हैं। यह चित्र संदेश देता है कि यदि महिलाओं का सम्मान नहीं होगा तो पूरा समाज बिखर जाएगा।
उत्कर्ष बताते हैं कि उनके चित्र में कई चेहरे व एक फ्रॉक दिखाई गई है। फ्रॉक महिलाओं का सम्मान करने का संदेश देती है वहीं, चित्र में बने चेहरों में से कुछ में खुशी व कुछ में गम का भाव है।
यह दर्शा रहे हैं कि प्रोत्साहन पाने वाली महिलाएं समाज को गौरवान्वित करतीं हैं और जो चेहरे दुखी हैं वह महिलाओं को समाज में बराबरी के दर्जे के तलबगार हैं। झांसी से एक अन्य चित्रकार पारस वर्मा भी टॉप 12 में जगह बनाने में सफल रहे हैं।