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गुजरात दंगे: शाह के खिलाफ जांच से SC का इनकार

Wed, 14 Oct 2015 07:46 AM IST
Updated Wed, 14 Oct 2015 07:46 AM IST
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The Supreme Court ruled against Amit Shah inquiry

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की भूमिका की जांच कराने से इनकार कर दिया है।

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पहली बार सुप्रीम कोर्ट यह कहने पर मजबूर हो गया कि पॉलिटिक्स और एक्टिविज्म के जरिए शीर्ष अदालत में गुजरात दंगों से संबंधित कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
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इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात कैडर के बर्खास्त आईपीएस संजीव भट्ट की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें दंगा मामलों में अमित शाह की भूमिका की जांच करने की गुहार की गई थी। आरोप लगाया गया था कि अमित शाह ने दंगा मामले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

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अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश की गई

The Supreme Court ruled against Amit Shah inquiry

चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि संजीव भट्ट ने सही इरादे के साथ याचिका दाखिल नहीं की थी और इसके पीछे किसी और का मकसद साधना था।

पीठ ने न केवल भट्ट द्वारा अमित शाह और अन्य की भूमिका की जांच के लिए विशेष जांच दल के गठन की याचिका ठुकरा दी बल्कि भट्ट पर चल रहे दो मुकदमे पर लगी रोक हटा दी।

शीर्ष अदालत ने भट्ट को दोनों मामले में ट्रायल झेलने का आदेश दिया है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि भट्ट लगातार विरोधी राजनीतिक दलों के नेताओं और गैर सरकारी संगठन के संपर्क में थे।

शायद याचिकाकर्ता यह भूल गया था कि वह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। उसने नौ सालों के बाद अगर सच्चाई बतानी थी तो उसे यह तरीका नहीं अपनाना चाहिए था। उन्हें पॉलिटिक्स और एक्टिविज्म के जरिए शीर्ष अदालत, अमाइक्स क्यूरी समेत अन्य पर दबाव नहीं बनाना चाहिए था।

वर्ष 2011 में भी भट्ट ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि 2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेता अमित शाह समेत अन्य की भूमिका का खुलासा करने के कारण गुजरात सरकार उन्हें निशाना बना रही है।

बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की याचिका खारिज

The Supreme Court ruled against Amit Shah inquiry

भट्ट ने दावा किया था कि वह 27 फरवरी, 2002 को हुई उस बैठक में शामिल हुए थे जिसमें कथित तौर पर मोदी ने कहा था कि हिंदुओं को अपना गुस्सा उतारने का मौका दिया जाना चाहिए।

पहले भट्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की गुहार की थी लेकिन बाद में एसआईटी जांच की गुहार की। भट्ट का कहना था कि केंद्र में एनडीए की सरकार है, लिहाजा सीबीआई निष्पक्ष तरीके से इसकी जांच नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि आखिरकार भट्ट ने नौ वर्ष तक क्यों चुप्पी साधे रखा।

साथ ही पीठ ने भट्ट को आम नागरिक की तरह दो मामलों का ट्रायल झेलने के लिए कहा। एक एफआईआर में गुजरात के एडिशनल एडवोकेट जनरल (वर्तमान में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल) रहे तुषार मेहता का ई-मेल हैक करने का आरोप है।

दूसरे मामले में एक पुलिसकर्मी ने भट्ट पर आरोप लगाया है कि उस पर दबाव बनाकर दंगों को लेकर गठित आयोग के समक्ष गलत हलफनाफा दाखिल करवाया गया।

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