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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'सुब्रत रॉय अपनी इच्छा से जेल में हैं' , अपील खारिज

Tue, 04 Aug 2015 01:25 PM IST
Updated Tue, 04 Aug 2015 01:25 PM IST
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The Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ जेल में बंद सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की मानवता के आधार पर रिहाई की अपील ठुकरा दी है। इस अपील पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि ‘आप अपनी इच्छा से जेल में हैं।

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’सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि क्यों न संपत्तियों को बेचने के लिए एक रिसीवर नियुक्त कर दिया जाए। उधर, सेबी ने भी सुप्रीम कोर्ट मे अर्जी दायर कर कहा है कि सहारा की संपत्तियों पर रिसीवर नियुक्त किया जाना चाहिए।
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जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुब्रत रॉय को पूर्व में किए गए उस दावे की याद दिलाई जिसमें रॉय ने कहा था कि सहारा समूह के पास अपने निवेशकों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त परिसंपत्तियां हैं।
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जस्टिस ठाकुर ने कहा, ‘परेशानी वाली बात यह है कि उक्त व्यक्ति (रॉय) ने कहा था कि उसके पास 1,85,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां हैं। रॉय ने अदालत से कहा था कि उनके पास काफी धन है लेकिन जब इसके पांचवें हिस्से का भुगतान करने की बारी आई तो वह इसे नहीं कर पा रहे हैं।

आपको अपनी संपत्ति के पांचवें हिस्से का ही भुगतान करना है। एक ऐसा आदमी जिसके पास इतनी सारी संपत्ति है वह अपनी आजादी का त्याग जेल में रहने के लिए कर रहा है और अपनी संपत्ति को नहीं छोड़ रहा है। आप अपनी इच्छा से जेल में हो।’

'सुब्रत रॉय अपनी इच्छा से जेल में हैं'

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अदालत की यह टिप्पणी तब आई जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सुब्रत रॉय के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही पूरी नहीं हुई है, ऐसे में उन्हें जेल में रखना अदालत के लिए उचित नहीं है।

सिब्बल ने आगे कहा कि दूसरे बड़े औद्योगिक घरानों को ऐसी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। उनका 1000 करोड़ रुपये तक का लोन भी आरबीआई या बैंकों द्वारा पांच या दस साल में भुगतान के लिए पुनर्निर्धारित कर दिया जाता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि सुब्रत रॉय के लिए जेल में रहते अपनी रिहाई की खातिर इतनी बड़ी धनराशि जुटाना मुश्किल हो रहा है और अदालत को मानवता के आधार पर उनकी रिहाई पर विचार करना चाहिए।

हालांकि इस पर बेंच ने कहा, ‘कृपया समझिये हमारी भी कुछ विवशता है। इस अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों को पढ़िए। आप समझ जाएंगे कि आपका मुवक्किल जेल में क्यों है। इसे पढ़िए फिर आप कुछ नहीं कहेंगे।’

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