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'पहले पत्नी का कराओ इलाज फिर होगा तलाक'

Fri, 04 Dec 2015 09:22 AM IST
Updated Fri, 04 Dec 2015 09:22 AM IST
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the supreme court decision on matter of divorce

यह देखते हुए कि पत्नी स्तर कैंसर से पीड़ित है सुप्रीम कोर्ट ने एक दंपति को आपसी सहमति के बाद भी तलाक की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने पति को याद दिलाया कि पत्नी की देख-रेख करना उसकी जिम्मेदारी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने पति से कहा कि पहले वह अपनी पत्नी का इलाज कराए फिर तलाक के बारे में सोचे। यह आदेश एक व्यक्ति द्वारा यह दावा करने केबाद दिया कि उसके और उसकी पत्नी ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लिया है और पत्नी के साथ हुए करार के तहत वह साढ़े बारह लाख रुपये देने को तैयार है।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि एक पति के लिए पत्नी की देखभाल करना उसका पवित्र कर्तव्य है। पीठ ने यह भी महसूस किया कि पति-पत्नी के बीच हुए इस करार में प्रभावित करने की बू आ रही है।

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शीर्ष अदालत ने तलाक की इजाजत देने से किया इनकार

the supreme court decision on matter of divorce

न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल और सी नग्गपन की पीठ ने कहा कि महज इलाज का खर्च देकर तलाक के आवेदन को स्वीकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने पति-पत्नी के बीच करार को नकार दिया। पीठ ने कहा कि पत्नी को इलाज के लिए सुविधाएं प्रदान करना पति का प्राथमिक कर्तव्य है।

पीठ ने कहा कि हिंदू पत्नी के लिए पति को देवता समान माना जाता है और वह निस्वार्थ भाव से पति की सेवा करती है। पत्नी पति के हर सुख-दुख में सहभागी होती है। इस मामले में दोनों की शादी 2010 में हुई थी लेकिन वर्ष 2015 की शुरुआत में दोनों अलग-अलग रहने लगे।

पीठ ने पति को पत्नी की इलाज के लिए तत्काल पांच लाख रुपये देने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया कि फैमिली कोर्ट में उसकी तलाक की याचिका पर तभी विचार किया जाएगा जब तक पत्नी की बीमारी न खत्म हो जाए। बीमारी दूर होने के बाद पत्नी सही तरीकेसे अपना निर्णय लेने में सक्षम होगी।

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