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गोमांस के सेवन से कैंसर का खतरा, रिसर्च में खुलासा

Thu, 24 Dec 2015 04:14 AM IST
Updated Thu, 24 Dec 2015 04:14 AM IST
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The risk of cancer from consumption of beef.

लाल मांस (बीफ) और प्रोसेस्ड मांस के सेवन से कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ा है।

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मांस के अत्यधिक सेवन से किडनी पर दबाव पड़ता है और इससे प्रोस्टेट और कोलन कैंसर की चपेट में लोग आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 20 साल के अध्ययन में ये तथ्य सामने आए हैं।

बुधवार को भेलूपुर स्थित होटल डायमंड में पत्रकारों से बातचीत में इंटरनेशनल हिंदू स्कूल के संस्थापक और बीएचयू आईएमएस के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के पूर्व हेड डॉ. सुमन कुमार मिश्रा ने यह जानकारी दी।
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कैंसर और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा रही मांसाहार की प्रवृत्ति : डॉ. सुमन

The risk of cancer from consumption of beef.

डॉ. सुमन कुमार मिश्रा ने बताया कि गोमांस, सूअर का मांस, बकरी और ऊंट का मांस लाल मांस के स्रोत हैं। बताया कि 70 फीसदी कैंसर की मुख्य वजह मांसाहार का सेवन है। बचाव के लिए जरूरी है कि मांसाहार का सेवन न किया जाए या फिर बहुत कम किया जाए।

उन्होंने बताया कि मांसाहार की प्रवृत्ति ग्लोबल वार्मिंग को भी बढ़ा रही है। हाल में पेरिस में हुए जलवायु परिवर्तन पर हुए सम्मेलन में कैलिफोर्निया के गवर्नर रह चुके अर्नाल्ड श्वार्जनेगर ने भी इस पर चिंता जताई थी और कहा था कि अगर ग्लोबल वार्मिंग को कम करना है है तो हमें मांसाहार की प्रवृत्ति छोड़नी होगी। मांसाहार प्रकृति को असंतुलित करता है।

उन्होंने कहा कि कैंसर की रोकथाम के लिए तुलसी, हल्दी, लहसुन, अदरक, काली मिर्च, ओरीगनो (अजवाइन की पत्ती) का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो कैंसर कोशिकाओं के प्रसार को रोकते हैं।

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