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राष्ट्रपति ने दिलाई सामाजिक मूल्यों की याद

Tue, 20 Oct 2015 07:57 AM IST
Updated Tue, 20 Oct 2015 07:57 AM IST
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The President advice

पिछले दिनों दादरी कांड की पृष्ठभूमि में धार्मिक असहिष्णुता की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताने वाले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक बार फिर सामाजिक मूल्यों की याद दिलाई है।

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बीरभूम जिले के किरनाहर में अपने पैतृक निवास पर पारिवारिक दुर्गा पूजा समारोह में शामिल होने आए राष्ट्रपति ने कहा कि क्या देश में सहनशीलता और असहमति की स्वीकार्यता खत्म हो रही है।
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उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मानवतावाद और बहुलतावाद को नहीं त्यागा जाना चाहिए। पांच हजार साल पुरानी भारतीय सभ्यता की याद दिलाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सबको समाहित करके चलना भारतीय समाज की विशेषता है।
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हमारी एकजुट शक्ति का इस्तेमाल निश्चिततौर पर समाज की बुरी ताकतों से मुकाबले में होना चाहिए। गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के बिसाहड़ा गांव में एक मुस्लिम व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या की घटना पर राष्ट्रपति ने देश की एकता और विविधता की याद दिलाई थी।

कहा, सबको समाहित करके चलना भारतीय समाज की विशेषता

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सोमवार को मुंबई में बीसीसीआई मुख्यालय में शिवसेना के हंगामे और पिछले सप्ताह पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी की एक किताब विमोचन कार्यक्रम और गजल गायक गुलाम अली के कार्यक्रम को लेकर शिवसेना ने विरोध के बीच राष्ट्रपति की नसीहत को अहम माना जा रहा है।

एक स्थानीय साप्ताहिक अखबार की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने सहनशीलता और असहमति की स्वीकार्यता में कमी पर चिंता जताते हुए श्रोताओं को रामकृष्ण परमहंस के ‘जातो मत जातो पथ’ कथन याद दिलाया। उन्होंने कहा कि अपनी सहनशीलता के कारण ही पांच हजार सालों से भारतीय सभ्यता बची हुई है।

उन्होंने हाल में पश्चिम एशिया के अपने दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वहां उनसे पूछा गया कि इतनी विविधता के बावजूद भारत इतना मजबूत राष्ट्र कैसे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह सवाल क्यों पूछा गया। लेकिन, संभव है कि चल रही अस्थिरता के कारण यह सवाल पूछा गया हो।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सभ्यता ने इसने हमेशा से असहमति और भिन्न मत को जगह दी है। यही कारण है सैकड़ों भाषाओं के साथ 1600 से अधिक बोलियां बोलने वाले और सात धर्मों के लोग एक साथ रह रहे हैं। उन्होंने दुर्गा पूजा महोत्सव की पूर्व संध्या पर लोगों को बधाई देते हुए आशा जताई कि असुरों और द्वेष फैलाने वाली शक्तियों का नाश होगा।

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