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योजना आयोग की जगह लेगा 'नीति आयोग'

Mon, 01 Dec 2014 12:05 PM IST
Updated Mon, 01 Dec 2014 12:05 PM IST
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Policy Commission will Replace Planning Commission in December

योजना आयोग की जगह नई संस्था बनाने का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके नाम और ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। दिसंबर में नई संस्था अस्तित्व में आ सकती है।

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आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई संस्था की संरचना पर विचार के लिए सात दिसंबर को सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। नई संस्था 64 साल पुराने योजना आयोग का स्थान लेगी।
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नई संस्था के नाम और भूमिका को लेकर तमाम सुझाव मिले हैं। इसके लिए सतत विकास आयोग, राष्ट्रीय विकास एजेंसी, सामाजिक आर्थिक विकास आयोग या भारत प्रगति लक्ष्य नाम सुझाए गए हैं। माना जा रहा है कि इस नई संस्था का नाम नीति आयोग या पॉलिसी कमीशन होगा।
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योजना आयोग की तर्ज में नई संस्था के भी अध्यक्ष प्रधानमंत्री के होने की संभावना है। इसके चार डिवीजन हो सकते हैं, जिनमें केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही उद्योग की ओर से विशेषज्ञ शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री ने बुलाई मुख्यमंत्रियों की बैठक

Policy Commission will Replace Planning Commission in December

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) मिशन पहले योजना आयोग का हिस्सा था, लेकिन बाद में इसे वित्त मंत्रालय से संबद्ध कर दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि संस्था का एक अंतर राज्य परिषद सचिवालय भी होगा, जो वर्तमान में गृह मंत्रालय के अधीन है।

पूर्ववर्ती राजग सरकार के दौरान इसकी नियमित बैठक होती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर योजना आयोग को खत्म कर नई संस्था बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद प्रस्तावित संस्था की संरचना पर विचार करने के लिए आयोग ने विशेषज्ञों के साथ कई बैठकें की।

देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने योजना आयोग का गठन किया था। योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते थे जबकि उपाध्यक्ष ज्यादातर समय में राजनीतिक व्यक्ति ही रहा है, जिसका दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर होता था।

गुलजारी लाल नंदा, वीटी कृष्णमाचारी, सी सुब्रमण्यम, पीएन हक्सर, मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी, केसी पंत, जसवंत सिंह, मधु दंडवते, मोहन धरिया और आरके हेगड़े अलग अलग वक्त पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे। मोंटेक सिंह अहलूवालिया इसके अंतिम उपाध्यक्ष हैं।

संगठन के चार डिवीजन
- अंतर राज्य परिषद
- योजना मूल्यांकन कार्यालय
- आधार (यूआईडीएआई)
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी)

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