राजीव गांधी के हत्यारों की होगी रिहाई?
सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा पर माफी मिलने के एक दिन बाद तमिलनाडु सरकार ने राजीव गांधी के सभी सातों हत्यारों की जेल से रिहाई का ऐलान कर दिया है। कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसले पर मुहर लगने के बाद मुख्यमंत्री जयललिता ने विधानसभा में इसका ऐलान किया।
अब राजीव गांधी के हत्यारे सांतन, मुरुगन, पेरारिवलन और नलिनी व तीन अन्य को जल्द ही जेल से रिहा कर दिया जाएगा। ये सभी आरोपी जेल में 14 साल की सजा काट चुके हैं।
कल ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों सांतन, मुरुगन, पेरारिवलन की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। नलिनी की फांसी की सजा को पहले ही उम्रकैद में बदल दिया गया था। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके लंबे समय से इन दोषियों की रिहाई की मांग करती आ रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदला
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पी सदाशिवम, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एनवी रमन की पीठ ने तीनों दोषियों टी सुतेन्द्र राजा उर्फ संतम, वी श्रीहरन उर्फ मुरूगन और एजी पेरारिवलन उर्फ अरीवू की फांसी की सजा को बुधवार को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।
सर्वोच्च अदालत ने दया याचिकाओं के निपटारे में अनावश्यक देरी को अपने फैसले का आधार बनाया। चीफ जस्टिस पी सदाशिवम ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कार्यपालिका का यह कर्तव्य है कि वह निश्चित समय के भीतर अपने अधिकारों का इस्तेमाल करे, चाहे फैसला किसी के पक्ष में हो।
सर्वोच्च अदालत ने सरकार से अपील भी कि वह भविष्य में दया याचिकाओं के त्वरित निपटारे के लिए राष्ट्रपति को उचित सलाह दे। चीफ जस्टिस ने फैसले का मुख्य अंश पढ़ते हुए कहा कि सरकार को दया याचिकाओं का निस्तारण सुनियोजित तरीके से करना चाहिए।
नलिनी की मां ने की थी अपील
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में आजीवन कैद की सजा काट रही नलिनी की मां पद्वंती ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता से इस हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाए सभी अभियुक्तों की रिहाई की मांग की थी।
पद्वंती ने बेल्लूर की केंद्रीय जेल में कैद बेटी से मुलाकात के बाद कहा था कि दो दशक से अधिक समय तक इंतजार के बाद आखिरकार न्याय मिला।
डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए हत्या के दोषियों की रिहाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और तीनों दोषियों के जेल में बिताए दिनों पर विचार करते हुए राज्य और केंद्र सरकार को उन्हें तुरंत रिहा कर देना चाहिए।
1991 में हुई थी राजीव की हत्या
पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई, 1991 को महिला मानव बम से कर दी गई थी। टाडा की विशेष अदालत ने 1998 में इस मामले के 26 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी।
बाद में 2000 में सुप्रीम कोर्ट ने चार की फांसी की सजा की पुष्टि की थी, जिनमें इन तीन हत्यारों के अलावा नलिनी भी शामिल थी। इसके बाद मद्रास हाईकोर्ट ने एलके वेंकट की एक याचिका पर नौ सितंबर 2011 को तीनों हत्यारों की फांसी पर रोक लगा दी थी तथा केंद्र एवं तमिलनाडु सरकार को नोटिस भी जारी किए थे।
शीर्ष अदालत ने मई 2012 में राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की मौत की सजा के खिलाफ दायर याचिकाओं पर विचार करने का निश्चय किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि तीनों की याचिकाएं उसके पास भेज दी जाएं।