फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   the officers those are not happy with modi

वो सात अफ़सर जिनकी नहीं बनी मोदी से

Tue, 06 May 2014 03:51 PM IST
अंकुर जैन/बीबीसी, अहमदाबाद से
अंकुर जैन/बीबीसी, अहमदाबाद से Updated Tue, 06 May 2014 03:51 PM IST
विज्ञापन
the officers those are not happy with modi

गुजरात में कई ऐसे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी हैं जो मोदी की सत्ता के लिए चुनौती साबित हुए हैं।

विज्ञापन


मोदी समर्थकों का कहना है कि इन अफ़सरों ने गुजरात के मुख्यमंत्री पर 'झूठे' आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, ऐसे लोग भी हैं जो मानते हैं कि ये अफ़सर निडर हैं और उन्हें 'सच' बोलने की सज़ा मिल रही है।

आगे पढ़िए कौन हैं वो सात अफसर?

संजीव भट्ट (निलंबित डीआईजी)

the officers those are not happy with modi

क्या किया? संजीव भट्ट ने गुजरात दंगों की जाँच करने वाले विशेष दल (एसआईटी) और नानावटी कमीशन से कहा कि वे उस मीटिंग में मौजूद थे जिसमें गोधरा कांड के बाद नरेंद्र मोदी ने कथित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से दंगाइयों से नरमी से निपटने को कहा था।

नतीजा क्या हुआ? संजीव भट्ट का दावा है कि इसके बाद ही उन्हें निलंबित किया गया, उनके ख़िलाफ़ 15 से 20 साल पुराने दो केसों की जाँच शुरू हो गई। भट्ट को बाद में एक कांस्टेबल से ग़लत हलफ़नामा दाख़िल करवाने के आरोप में गिरफ़्तार भी किया गया था।



राहुल शर्मा (डीआईजी)

क्या किया? जांच एजेंसियों को 2002 के दंगों के दौरान कुछ भाजपा नेताओं की फ़ोन पर हुई बातचीत की सीडी दी। मोदी की कैबिनेट में मंत्री माया कोडनानी और विश्व हिंदू परिषद के एक नेता की गिरफ़्तारी इस सीडी के बग़ैर संभव नहीं थी।

नतीजा क्या हुआ? राहुल शर्मा कहते हैं कि अब तक गुजरात सरकार ने उन्हें दर्जनों नोटिस थमाए हैं जिसमें एक तो स्पेलिंग में ग़लती को लेकर है। गुजरात सरकार ने राहुल शर्मा पर उसी सीडी को गुम करने का भी केस दर्ज किया है जिसे उन्होंने ही जांच एजेंसियों को बतौर सबूत दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

आरबी श्रीकुमार (रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक)

the officers those are not happy with modi

क्या किया? गोधरा कांड की जाँच के लिए गठित नानावटी-शाह आयोग के सामने मोदी के ख़िलाफ़ गवाही और दस्तावेज़ देने वाले पहले पुलिस अधिकारी थे। उन्होंने दंगों की जाँच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी सरकार के खिलाफ़ दस्तावेज़ सौंपे।

नतीजा क्या हुआ? श्रीकुमार का कहना है कि गुजरात सरकार ने इसके बाद उनका प्रमोशन रोक दिया जिसे उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती देकर हासिल किया।




कुलदीप शर्मा (रिटायर्ड एडीजीपी)

ने क्या किया? सोहराबुद्दीन शेख फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में सीबीआई को कई अहम जानकारी दीं जिनकी कड़ी मोदी के नज़दीकी अमित शाह तक पहुँची।

कुलदीप शर्मा ने मोदी और शाह पर आरोप लगाया कि उन पर दबाव डाला गया कि वह सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई को एक इमीग्रेशन रैकेट चलाने के केस में फंसा दें।

नतीजा क्या हुआ? कुलदीप शर्मा का कहना है कि राज्य सरकार ने उनकी पदोन्नति रोक दी। मोदी सरकार ने उनके ख़िलाफ़ 1984 के एक एनकाउंटर केस को दोबारा खोलने की कोशिश की लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने इसे नामंज़ूर कर दिया।

विज्ञापन

प्रदीप शर्मा (सस्पेंडेड आईएएस अफ़सर)

the officers those are not happy with modi

क्या किया? प्रदीप शर्मा ने एक महिला की जासूसी कराने के मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है, उन्होंने शाह और मोदी पर इसमें शामिल होने का आरोप लगाया है, इस मामले को ही स्नूपगेट कहा जा रहा है।

क्या हुआ? प्रदीप शर्मा का कहना है कि उनके ख़िलाफ़ 2001 में भूकंप पीड़ितों के पुनर्वास के दौरान ग़बन का केस फाइल किया गया। गुजरात सरकार शर्मा के ख़िलाफ़ जासूसी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट में गई है।





सतीश वर्मा (जूनागढ़ पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के प्रिंसिपल)

क्या किया? विशेष जांच दल (एसआईटी) के प्रमुख सदस्य सतीश वर्मा ने इशरत जहाँ एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया और एसआईटी के कुछ सदस्यों पर आरोप लगाया कि वे जाँच को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।

नतीजा क्या हुआ? वर्मा का कहना है कि राज्य सरकार ने कथित दुर्व्यवहार के 15 साल पुराने एक मामले में उन्हें नोटिस दिया। गुजरात सरकार ने उनके खिलाफ 1996-97 के एक कथित फ़र्ज़ी एनकाउंटर केस की जांच भी दोबारा शुरू करवा दी।

रजनीश राय (डीआईजी)

the officers those are not happy with modi

क्या किया? 2007 में स्टेट सीआईडी (क्राइम) में डीआईजी के तौर पर तैनात राय ने आईपीएस अधिकारियों डीजी वंजारा और राजकुमार पांडियन को सोहराबुद्दीन शेख फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में गिरफ्तार किया।

नतीजा क्या हुआ? राय कहते हैं कि गुजरात सरकार ने उनका प्रमोशन रोक दिया और वार्षिक कॉन्फ़ीडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) डाउनग्रेड कर दी।

राय बाद में लॉ की परीक्षा देते हुए नकल करने के मामले में पकड़े गए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed