नए खुलासे ने बढ़ाई भाजपा की मुसीबत, दो धड़ों में बंटी पार्टी
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आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी के पक्ष में दिए गए हलफनामे में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हस्ताक्षर की पुष्टि ने भाजपा और मोदी सरकार की मुसीबतें बढ़ा दी है।
नए खुलासे के बाद जहां पार्टी पर कांग्रेस का दबाव और बढ़ गया है, वहीं वसुंधरा के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर पार्टी दो धड़ों में बंट गई है।
एक धड़ा अगले महीने से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को हंगामे से धुलने से बचाने और बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर छवि बचाने के लिए वसुंधरा की बलि चाहता है, वहीं दूसरा धड़ा इस मामले में तत्काल कार्रवाई के खिलाफ है।
इस धड़े के नेताओं का कहना है कि वसुंधरा के इस्तीफे के बाद विपक्ष इस मामले में घिरे अन्य नेताओं के भी इस्तीफे का दबाव बढ़ाएगा।
वसुंधरा के पलटवार से भी पार्टी आशंकित
इसके अलावा वसुंधरा के इस्तीफे से इस विवाद के खत्म होने की भी कोई गारंटी नहीं है। फिर कार्रवाई होने की स्थिति में वसुंधरा की ओर से बगावत का बिगुल भी बजाए जाने का खतरा है।
इस बीच समझा जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व को दी गई सफाई में वसुंधरा ने हलफनामे में अपने हस्ताक्षर की बात तो स्वीकारी है, मगर यह भी कहा है कि उनके वकील इन कागजातों की सत्यता जांचेंगे।
वसुंधरा ने आलाकमान को अपने तेवर दिखाते हुए यह भी साफ कर दिया है कि उनका इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में नए खुलासे के बाद पार्टी नेतृत्व ने राज्य इकाई के अध्यक्ष अशोक परनानी और सह संगठन महासचिव सौदान सिंह के माध्यम से इन खुलासों पर वसुंधरा की राय जानी थी।
सियासी घाटे का सता रहा है डर
मोदी की मदद प्रकरण में वसुंधरा के खिलाफ हुए नए खुलासे के बाद इस विवाद से बाहर निकलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व माथापच्ची में जुटा है। खासतौर से सरकार और पार्टी को इस प्रकरण के बरकरार रहने के कारण मानसून सत्र के धुलने और बिहार विधानसभा चुनाव चुनाव में पार्टी के खिलाफ माहौल बनने का डर सता रहा है।
हालांकि वसुंधरा की विदाई की राह में कई कठिनाईयों के कारण शीर्ष नेतृत्व अंतिम फैसला नहीं कर पा रहा है। नए खुलासे के बाद भी गृह मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी वसुंधरा के साथ खड़े हैं। वसुंधरा के समर्थक एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक राजस्थान की मुख्यमंत्री का तत्काल इस्तीफा पार्टी और सरकार की परेशानी को और बढ़ा देगा।
फिर विपक्ष इस मामले में पहले से घिरी विदेश मंत्री के इस्तीफे का भी दबाव बनाएगा। इसके अलावा विपक्ष के सूची में ललित मोदी से संबंध रखने वाले नेताओं की सूची में कई और वरिष्ठ नेताओं के नाम हैं।
फिर हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि राजस्थान में वसुंधरा को राज्य इकाई के साथ-साथ अधिकांश विधायकों का समर्थन हासिल है। ऐसे में वसुंधरा के मामले में कोई भी फैसला लंबी माथापच्ची के बाद ही संभव है।
इस बीच कुर्सी पर दिख रहे खतरे के बादल के मद्देनजर वसुंधरा ने भी आलाकमान को तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को साफ संदेश दिया है कि वह इस मामले में इस्तीफा देने नहीं जा रही।