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तुलसी जयंती पर विशेष : दुलही गांव में है सुंदरकांड की पांडुलिपि

Sat, 22 Aug 2015 01:38 PM IST
Updated Sat, 22 Aug 2015 01:38 PM IST
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The manuscript of Sunderkand is in the Dulhi village

रामचरित मानस के कुछ अंशों की रचना अवध क्षेत्र का हिस्सा रहे लखीमपुर के धौरहरा कस्बे में हुई। सोलहवीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसी दास के धौरहरा में प्रवास करने, बालकांड और सुंदरकांड की रचना करने के प्रमाण मिलते हैं। बालकांड और सुंदरकांड की पांडुलिपि इस जिले में आज भी सुरक्षित हैं।

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गोस्वामी तुलसीदास ने जिस चबूतरे पर बैठकर रामचरित मानस की रचना की वह चबूतरा तुलसी चौरा के नाम से विख्यात है। कई अन्य प्रमाण भी यहां तुलसीदास के प्रवास और रामचरित मानस की रचनास्थली होने को पुष्टि करते हैं।
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धौरहरा कस्बे से सटा हुआ राम बटी नाम से प्रसिद्ध स्थान है। गोस्वामी तुलसी दास ने 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में यहां सुरम्य प्राकृतिक परिवेश में प्रवास कर बालकांड और सुंदरकांड की रचना की।
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जिस चबूतरे पर बैठकर उन्होंने रामचरित मानस की रचना की वह 100 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा आयताकर तुलसी चौरा आज भी मौजूद है। इसी चबूतरे के एक सिरे पर तुलसीदास द्वारा रोपित विशाल वटवृक्ष इसकी प्रचीनता को प्रमाणित करता है।

तुलसी चौरा के पश्चिम में एक पुराना ठाकुरद्वारा है, जो अब सौंदर्यीकरण के बाद भव्य रूप ले चुका है। ठाकुरद्वारे में तुलसीदास ने श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाएं स्थापित की थीं।

यहां एक भव्य हवनकुंड भी है। ठाकुरद्वारे पर लगे शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण वर्ष 1937 में होने का पता लगता है। इससे पहले यहां छोटा सा मंदिर रहा होगा, ऐसा लोगों का अनुमान है।

यहां सुरक्षित है सुंदरकांड और बालकांड की पांडुलिपि

The manuscript of Sunderkand is in the Dulhi village

रामचरित मानस के सुंदरकांड की मूल पांडुलिपि धौरहरा तहसील क्षेत्र के दुलही गांव में सुंदर लाल दीक्षित के परिवार में सुरक्षित है। अब इसकी देखरेख जागेश्वर प्रसाद दीक्षित कर रहे हैं।

इसे गोरखपुर की गीता प्रेस ने मूल और प्रामाणिक माना है। उधर धौरहरा में दीपेंद्र मिश्र का परिवार अपने यहां बालकांड की पांडुलिपि होने का दावा कर रहा है। यह पांडुलिपियां भोजपत्र पर सुंदर अक्षरों में लिखी हैं।

प्रमुख धार्मिक स्थल बन गया रामबटी

रामबटी का विशाल परिसर अब एक प्रमुख धार्मिक स्थल बन चुका है। परिसर में करीब 70 फुट ऊंचा एक भव्य मंदिर है। यह करीब 12 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना हुआ है। तुलसी चौरा चारों तरफ हरे भरे पेड़ों से घिरा हुआ है। यहां के बड़े मैदान में आए दिन मेले लगते और तमाम धार्मिक आयोजन होते हैं।

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