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जम्मू-कश्मीर: सरकार बनाने में फंसा है ये पेंच

Mon, 19 Jan 2015 09:07 AM IST
Updated Mon, 19 Jan 2015 09:07 AM IST
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the main hindrance to form the government in jammu

राज्यपाल शासन का सामना कर रहे जम्मू-कश्मीर में नई सरकार का रास्ता साफ हो सकता है। अनुच्छेद 370 और सशस्त्र बल विशेष अधिनियम (अफस्पा) पर पीडीपी का रुख नरम है।

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हालांकि, रोटेशन (तीन-तीन साल का कार्यकाल) पर पेंच फिलहाल कायम है। अगर पीडीपी अंतिम तीन साल भी भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनाने पर राजी हुई तो राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ हो सकता है।
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दबाव बनाने के लिए भाजपा जहां अब भी रोटेशन के तहत पहले तीन साल तक खुद सरकार का नेतृत्व करना चाहती है, वहीं इस मुद्दे पर पीडीपी भी लगातार छह साल तक खुद सरकार चलाने की मांग से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।
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खास बात यह है कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के लिए मध्यस्थता की जिम्मेदारी मुख्य रूप से अलगाववादी नेता और पीपुल्स कांफ्रेंस के मुखिया सज्जाद लोन को सौंपी है।

नई सरकार में भाजपा चाहती है बराबरी

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लोन सरकार गठन के मामले में सत्ता हस्तांतरण सहित कई अन्य विकल्पों पर भी पीडीपी के साथ विचार विमर्श कर रहे हैं। भाजपा चाहती है कि नई सरकार में उसका भी बराबर का महत्व हो।

उल्लेखनीय है कि पीडीपी ने सरकार बनाने के लिए भाजपा के समक्ष सूबे से अफस्पा खत्म करने, सूबे में अनुच्छेद 370 बरकरार रखने और पूरे छह साल तक मुफ्ती मोहम्मद सईद को सीएम बनाने की शर्त रखी थी।

हालांकि, बीते दिनों नेशनल कांफ्रेंस के समर्थन को ठुकराकर पीडीपी ने भाजपा के साथ सरकार बनाने का विकल्प बचाए रखा था। भाजपा के बेहद खास सूत्र के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाने की दिशा में बात कुछ आगे बढ़ी है।

इसके तहत पीडीपी अफस्पा और अनुच्छेद 370 जैसे विवादित मुद्दों को ठंडे बस्ते में डालने के लिए राजी है। हालांकि, सत्ता हस्तांतरण पर पेंच जस का तस कायम है।

बसपा जैसी हरकत न करे पीडीपी तो बन सकती है बात

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बसपा जैसी हरकत न करे पीडीपी तो बन सकती है बात

सूत्र के मुताबिक, भाजपा की मंशा सूबे में अपने नेतृत्व में सरकार बनाकर इतिहास रचने का है। इसके लिए अगर पीडीपी उसे कार्यकाल का अंतिम तीन साल भी देने पर राजी हो तो बात बन सकती है।

मगर इसके लिए कुछ ऐसा करना होगा, जिससे यह सुनिश्चित हो कि सत्ता हस्तांतरण के समय पीडीपी उत्तर प्रदेश में बसपा जैसी हरकत न करे। अंतिम विकल्प के तौर पर पार्टी नई सरकार के कैबिनेट में आधी भागीदारी के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री के पद पर भी मान सकती है।

फिलहाल, भाजपा के पीडीपी के साथ सरकार बनाने की दिशा में लोन भाजपा महासचिव राम माधव के लगातार संपर्क में हैं।

- भाजपा को सूबे में जबर्दस्त जनसमर्थन मिला है। नई सरकार में भाजपा की भूमिका अहम होगी। जहां तक अफस्पा और अनुच्छेद 370 की बात है तो इस मामले में हमारे मध्यस्थ काम कर रहे हैं।

जितेंद्र सिंह, पीएमओ में मंत्री

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