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'दुष्कर्म साबित करने के लिए चोट के निशान जरूरी नहीं'

Thu, 03 Jul 2014 07:05 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 03 Jul 2014 07:05 PM IST
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the injury of rape injures woman's soul

मुंबई उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय का यह फैसला समाज में लगातार बढ़ रहे दुष्कर्म के मामलों के लिए नकेल साबित होगा।

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टीओई की रिपोर्ट के अनुसार उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि दुष्कर्म साबित करने के लिए पीड़िता के शरीर में चोंट के निशान होना जरूरी नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म से महिला की आत्मा घायल होती है इसलिए इस अपराध को साबित करने के लिए उसका बयान ही काफी है।

आरोपी की याचिका पर दिया फैसला

the injury of rape injures woman's soul

कोर्ट ने यह फैसला तब दिया जब अभियुक्त राकेश पटेल ने याचिका दायर कर पीड़िता के शरीर में चोंट के निशान न होने और मेडिकल साक्ष्य न उपलब्‍ध आधार मामले को रद्द करने की मांग की थी।

अभियुक्त की याचिका को खारिज करते हुए न्यायधीश साधना जाधव ने कहा 'कोर्ट तथ्यों को नकार नहीं सकता जबकि महिला को शारीरिक चोंट न भी लगी हो। दुष्कर्म से महिला को केवल शारीरिक चोंट ही नहीं पहुंचती बल्कि मनोवैज्ञानिक आघात भी लगता है जिससे महिला की आत्मा घायल होती है।'

फैसले में सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ

the injury of rape injures woman's soul

न्यायाधीश जाधव ने अपने तर्क को मजबूती देते हुए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि मेडिकल साक्ष्य न उपलब्‍ध होने पर भी आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए पीड़िता का बयान ही काफी है। क्योंकि दुष्कर्म से पहले कौमार्य भंग होने की स्थिति किसी को दुष्कर्म करने का लाइसेंस नहीं देती।

गौरतलब है‌ कि पीड़िता नाबालिक है। वह अपने परिवार के साथ मुंबई के बांद्रा इलाके में रहती है जहां अभियुक्त ने उसके घर में अकेले पाकर दुष्कर्म किया था।

मामले की गंभीरता के आधार पर कोर्ट ने दोषी राकेश पटेल को 8 साल जेल दी है।

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